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Aatmanirbhar Bharat: दिव्यांग व्यक्तियों के लिए मसौदा नीति में आत्मनिर्भर भारत, अधिकारिता विभाग ने सभी संबंधित पक्षों से सुझाव देने को कहा

Tue, 14 Jun 2022 03:40 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 14 Jun 2022 03:40 AM IST
सार

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अधिकारिता विभाग ने मसौदा नीति पर संबंधित पक्षों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।

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Social Justice and Empowerment Ministry seeks public feedback on draft national policy on disability
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दिव्यांग व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय नीति के मसौदे पर स्टेकहोल्डरों से नौ जुलाई तक अपने सुझाव देने को कहा गया है। इस नीति के प्रमुख विशेषताओं में दिव्यांगता क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना, वास्तविक समय के आधार पर जानकारी मुहैया कराने को क्रियाशील डाटाबेस तैयार करना, आयुष अनुसंधान और देखभाल के बीच बेहतर समन्वय शामिल हैं।

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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अधिकारिता विभाग ने मसौदा नीति पर संबंधित पक्षों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। मसौदे में कहा गया है कि कच्चे माल की स्थानीय खरीद की जाएगी और पूरी तरह से स्वदेशी हाईएंड कृत्रिम अंग यानी घुटने के नीचे और घुटने से ऊपर के निर्माण की कोशिशें की जाएंगी। इस नीति का मकसद भारत के कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एएलआईएमसीओ) को उन्नत समकालीन उपकरणों से आधुनिक बनाना है।
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यह न केवल इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ाएगा बल्कि इसे बेहतर गुणवत्ता वाले सहायक उपकरण और सहायक उपकरण बनाने में भी सक्षम बनाएगा। इससे इन्हें आयात करने की आवश्यकता खत्म होगी। इसमें यह भी कहा गया है कि एक लक्षित मिशन यह सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया जाना चाहिए ताकि दिव्यांग व्यक्तियों को सुलभ और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिलें।
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इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम में दिव्यांगता को एक अहम घटक के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को पीएचसी, सीएचसी, स्वास्थ्य और वेलनेस केंद्रों तक मजबूत किया जाना चाहिए ताकि इन स्वास्थ्य सुविधाओं को उप जिला, ब्लॉक, गांव स्तर तक सक्षम बनाया जा सके। एमबीबीएस और अन्य मेउिकल कोर्सों में दिव्यांगता को एक मॉड्यूल के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए ताकि पुनर्वास पेशेवरों और पीडब्ल्यूडी को तैयार किया जा सके। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को दिव्यां व्यक्तियों के अधिकार कानून 2016 के उद्देश्यों के साथ जोड़ा जाना चाहिए।

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