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SC: 'सर्पदंश की समस्या पूरे देश में, कुछ करें', सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को राज्यों को साथ लेकर काम करने को कहा

Mon, 27 Jan 2025 03:31 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 27 Jan 2025 03:31 PM IST
सार

देश की सर्वोच्च अदालत ने देश में सांपों के लोगों से डसने की समस्या और उसके इलाज की कमी के मामले में ध्यान देते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या के निदान के लिए केंद्र सरकार को राज्यों को भी साथ लेने का निर्देश दिया है।

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'Snakebites across country, do something': SC asks Centre to take states on board
Supreme Court - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सांप के डसने की समस्या 'पूरे देश में' व्याप्त है और केंद्र को निर्देश दिया कि वह सभी राज्यों को साथ लेकर चिकित्सा सुविधाओं में सर्पदंश का उपचार उपलब्ध कराने के लिए 'कुछ करें'। मामले में जस्टिस बीआर गवई और एसवीएन भट्टी की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कहा गया था कि सर्पदंश ने के उपचार में महत्वपूर्ण एंटी-वेनम की कमी के कारण देश एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है।
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यह कोई विरोधात्मक मुकदमा नहीं- कोर्ट
पीठ ने इस दौरान केंद्र सरकार के वकील से कहा, 'आप राज्यों को साथ ले सकते हैं, क्योंकि ये समस्या पूरे देश में है।' पीठ ने आगे कहा, 'आप सभी राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सकते हैं और कुछ करने का प्रयास कर सकते हैं। यह कोई विरोधात्मक मुकदमा नहीं है।' इस मौके पर केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर उठाए गए अपने कदमों को रिकॉर्ड में पेश करेगी।
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राज्य सरकारों के वकीलों को जवाब दाखिल करने का मिला समय
वहीं कुछ राज्यों के वकीलों ने कहा कि वे मामले में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करेंगे, जिसके बाद पीठ ने उन्हें छह हफ्ते का समय दिया और उसके बाद मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। पिछले साल 13 दिसंबर को शीर्ष अदालत ने अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की तरफ से दायर याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब मांगा था। याचिका में पीड़ितों की जान बचाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों, सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में एंटी-वेनम और सर्पदंश उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
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देश में हर साल सर्पदंश से 58 हजार मौतें
वकील चांद कुरैशी के माध्यम से दायर याचिका में तर्क दिया गया था कि भारत में सर्पदंश से होने वाली मौतों की दर दुनिया में सबसे अधिक है, जहां हर साल लगभग 58,000 मौतें होती हैं। इस याचिका में तर्क दिया गया था कि इतनी अधिक मृत्यु दर के बावजूद एंटी-वेनम (पॉलीवेनम) की कमी है। याचिका में कहा गया था कि देश के कई ग्रामीण इलाकों में एंटी-वेनम का पर्याप्त स्टॉक नहीं है, जिससे सर्पदंश पीड़ितों के इलाज में देरी होती है।


इसलिए याचिका में सर्पदंश रोकथाम स्वास्थ्य मिशन और जन जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश देने की मांग की गई थी, ताकि मृत्यु दर को कम किया जा सके, खासकर ग्रामीण इलाकों में। याचिका में सरकारी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में मानक चिकित्सा मानदंडों के अनुसार विशेष प्रशिक्षित डॉक्टरों के साथ सर्पदंश उपचार और देखभाल इकाइयां स्थापित करने के निर्देश देने की मांग की गई है।

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