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डिग्री, पासपोर्ट और वीजा में पिता के नाम की अनिवार्यता खत्म करने के कर रहे प्रयास: स्मृति
Fri, 26 Jul 2019 04:21 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 26 Jul 2019 04:21 AM IST
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स्मृति ईरानी
- फोटो : सोशल मीडिया
डिग्री व अन्य शैक्षिक प्रमाणपत्रों, पासपोर्ट और वीजा जैसे दस्तावेजों में पिता के नाम की अनिवार्यता खत्म करने के लिए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय प्रयास कर रहा है। मंत्री स्मृति ईरानी ने बृहस्पतिवार को संसद में बताया कि एकल, तलाकशुदा, विधवा या किसी कारणवश बच्चों का पालन-पोषण अकेले कर रही माताओं की व्यवहारिक समस्याओं को देखते हुए ऐसा किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 2016-17 में मानव संसाधन विकास और विदेश मंत्रालय को उनके मंत्रालय ने पत्र लिखे थे। इनमें संबंधित दस्तावेजों को पिता के नाम के बिना जारी करने का अनुरोध किया गया है। 15 अप्रैल 2016 को विदेश मंत्रालय को लिखे पत्र में अनुरोध किया कि मां व बच्चे की इच्छा होने पर पासपोर्ट और वीजा जैसे दस्तावेजों में पिता का नाम शामिल नहीं किया जाए।
24 अप्रैल 2016 के पत्र में बताया गया कि जब तलाकशुदा महिला अपने बच्चे का वीजा बनवाती है तो उसे बच्चे के जैविक पिता यानी पूर्व पति से एनओसी लेनी होती है। इसमें व्यवहारिक दिक्कतें हैं, इसलिए इन मामलों में पिता का नाम दस्तावेज में दर्ज न करने की रियायत मिलनी चाहिए।
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उन्होंने बताया कि 2016-17 में मानव संसाधन विकास और विदेश मंत्रालय को उनके मंत्रालय ने पत्र लिखे थे। इनमें संबंधित दस्तावेजों को पिता के नाम के बिना जारी करने का अनुरोध किया गया है। 15 अप्रैल 2016 को विदेश मंत्रालय को लिखे पत्र में अनुरोध किया कि मां व बच्चे की इच्छा होने पर पासपोर्ट और वीजा जैसे दस्तावेजों में पिता का नाम शामिल नहीं किया जाए।
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24 अप्रैल 2016 के पत्र में बताया गया कि जब तलाकशुदा महिला अपने बच्चे का वीजा बनवाती है तो उसे बच्चे के जैविक पिता यानी पूर्व पति से एनओसी लेनी होती है। इसमें व्यवहारिक दिक्कतें हैं, इसलिए इन मामलों में पिता का नाम दस्तावेज में दर्ज न करने की रियायत मिलनी चाहिए।
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