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Smriti Irani: स्मृति ईरानी ने एआई में लैंगिक पक्षपात दूर करने पर दिया जोर, कहा- आज तकनीकी समानता की जरूरत
Wed, 05 Mar 2025 02:15 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Wed, 05 Mar 2025 02:15 PM IST
सार
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने महिला सशक्तीकरण को लेकर इंडो अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स सम्मेलन में ईरानी ने एआई में शामिल प्रणालीगत पक्षपात के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण पर ध्यान देने के लिए डिजिटल समानता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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सम्मेलन में बोलतीं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी।
- फोटो : PTI
विस्तार
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार को लैंगिक समानता के लिए तकनीक की समानता पर जोर दिया। महिला सशक्तीकरण को लेकर इंडो अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स सम्मेलन में ईरानी ने एआई में शामिल प्रणालीगत पक्षपात के बारे में बात की। साथ ही इस असमानता को दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की।
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उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों को महिला सशक्तीकरण पर ध्यान देने के लिए डिजिटल समानता को प्राथमिकता देनी चाहिए। आज एआई के इस दौर में पुरुषों का महिलाओं और महिलाओं का पुरुषों से मुकाबला नहीं है। बल्कि मानवता का मुकाबला है कि एआई हमारे साथ क्या करने वाला है? एक शोध में सामने आया है कि दुनिया के 133 एआई सिस्टम में से 44 फीसदी एआई लैंगिक समानता पर जोर नहीं देते हैं।
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उन्होंने एआई से जुड़ी वित्तीय प्रणाली में लैंगिक असमानता का एक उदाहरण भी दिया। स्मृति ईरानी ने कहा कि एक महिला जिसकी आय, टैक्स रिटर्न और वित्तीय स्थिति अपने पति के समान है उसको पति से 10 फीसदी कम क्रेडिट लिमिट का प्रस्ताव दिया जाता है। एक दूसरी महिला को पति से 20 गुना कम क्रेडिट सीमा दी गई, जबकि उनकी वित्तीय स्थिति भी समान थी।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री ने एआई संचालित उपभोक्ता व्यवहार के जरिये मनोवैज्ञानिक हेरफेर को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि महिलाओं द्वारा खरीदे जाने वाले 72 फीसदी सामग्री उपभोक्ता टिकाऊ और जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं पर अधिक खर्च को प्रोत्साहित करने के लिए एल्गोरिदम द्वारा डिजाइन की जाती है। जबकि उन्हें ऑनलाइन निवेश संबंधी सलाह मिलने की संभावना 33 फीसदी कम होती है। उन्होंने डिजिटल युग में उपभोक्ता व्यवहार खासकर महिलाओं का इस पर प्रभाव को लेकर शोध करने की भी अपील की।
पूर्व मंत्री ने भारत की वित्तीय प्रगति को सराहा। उन्होंने कहा कि जनधन योजना और मुद्रा योजना जैसी योजनाओं से लाखों महिलाएं सशक्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि बैंकर कहते हैं कि महिलाओं द्वारा संचालित व्यवसाय में एनपीए 1.8 फीसदी से 1.9 फीसदी होता है। जबकि पुरुषों के व्यवसाय में यह 2.3 फीसदी होता है। उन्होंने बैंकिंग में मौजूद असमानता पर भी बात की।
स्मृति ईरानी ने कहा कि बैंक खातों के स्वामित्व में कोई लैंगिक असमानता नहीं है। लेकिन महिलाओं को अपनी बचत के सापेक्ष केवल 28 फीसदी ऋण मिलता है। जबकि पुरुषों को यह 52 फीसदी मिलता है। यह तब होता है जब हमारे पास बेहतर एनपीए रिकॉर्ड है।
उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जिसने दुनिया को शून्य दिया और आईटी सेवा में हम अग्रणी हैं। आइए हम दुनिया को दिखाएं कि कैसे तकनीक में समानता हासिल की जाती है? उन्होंने कहा कि दुनियाभर में एआई पेशेवर महिलाएं केवल 22 फीसदी हैं। इसमें केवल 17 फीसदी महिलाएं नेतृत्वकारी की भूमिका निभाती हैं।
पूर्व मंत्री ने कहा कि हम यह चाहते हैं कि डिजिटल दुनिया को समान बनाया जाए। महिलाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में योगदान को समावेशी तकनीकी का समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रयास किए जाएं। साथ ही अगले विश्व महिला दिवस से पहले इसके परिणाम सामने आने चाहिए। इस आठ मार्च से अगले मार्च तक हमें तकनीकी समानता के लिए काम करना चाहिए। अगर हम ऐसा कर लेते हैं तो हम समानता, लैंगिक न्याय और बदलाव के नायक होंगे।
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