{"_id":"59003c2e4f1c1bb526c0c173","slug":"small-industry-bharti-demand-for-concession-in-gst","type":"story","status":"publish","title_hn":"GST में लघु उद्योगों को मिले रियायत, केंद्र में उठाएंगे मुद्दा","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
GST में लघु उद्योगों को मिले रियायत, केंद्र में उठाएंगे मुद्दा
संजय मिश्र, नई दिल्ली
Updated Wed, 26 Apr 2017 12:07 PM IST
विज्ञापन
GST (file photo)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार जीएसटी को आर्थिक सुधार के मामले में आजादी के बाद का सबसे बडा कदम करार दे रही है। तो सरकार के अपने संगठनों को ही जीएसटी के तहत लगने वाले नए कर दर को लेकर आशंका सता रही है।
विज्ञापन
जीएसटी के वर्तमान स्वरूप को देखकर संघ के संगठनों को लगता है कि यह लघु और मध्यम उद्योगों के लिए अहितकारी होगा। लघु उद्योग के क्षेत्र में कार्य करने वाली संघ की संस्था लघु उद्योग भारती ने जबलपुर में 23 जनवरी को संपन्न अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर जीएसटी कर दर पर अपनी चिंता जताई है।
विज्ञापन
इस बैठक में संघ की ओर से भाजपा का प्रभार देख रहे सह कार्यवाहक कृष्ण गोपाल भी उपस्थित थे। गोपाल ने अपने संबोधन में देशी की लघु उद्योग के दुर्दशा पर चिंता जताई है। सूत्र बताते हैं कि गोपाल ने अपने संबोधन में कहा कि बडे—बडे उद्योग तो देश में लग रहे हैं। लेकिन इनसे रोजगार का स्रजन ज्यादा नहीं है।
विज्ञापन
रोजगार तो केवल लघु उद्योगों से ही हासिल होगा। बताया जा रहा है कि लघु उद्योग भारती के पदाधिकारी जल्द ही केंद्र सरकार के शीर्ष नेतत्व से मुलाकात कर जीएसटी में लघु उद्योग के लिए रियायत की मांग करेंगे।
अमर उजाला से बातचीत में लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र गुप्ता ने बताया कि संगठन के जरिए पारित प्रस्ताव में जीएसटी दर की अडचनों पर चर्चा की गई है। लघु उद्योग भारती की मांग है कि लघु एवं मध्यम उद्योगों की आजादी के बाद से ही अनदेखी होती रही है। अब जीएसटी के पालन में इस क्षेत्र के लिए ठीक से नीति बन जाए। लघु उद्योग भारती जल्द ही अपना पक्ष मीडिया के सामने रखेगी।
सूत्र बताते हैं लघु उद्योग भारती ने जीएसटी पर प्रस्ताव पारित कर सरकार से जो मांग की है उसमें जीएसटी का सही ढंग से अनुपालन,नियम पालन में अनदेखी पर लगने वाले जुर्माने में नरमी बरतने, लघु उद्योग की सीमा को 1 करोड 50 लाख की छूट बरकरार रखने और प्रस्तावित कर की दर का 50 प्रतिशत ही तय करने की मांग है। इसके अलावा लघु उद्योग भारती सरकार से मांग करेगी की कषि और ग्रामीण उद्योगों पर कोई कर न लगे।
लघु उद्योग भारती महासचिव के अनुसार जीएसटी के तहत लगने वाले कर को लेकर जो प्रस्ताव है उसमें 20 लाख से उपर की सभी इकाई कर के समान दायरे में होगी। जबकि लघु उद्योगों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए 1करोड 50 लाख तक के इकाईयों को विशेष रियायत बरती गई है। इसी तरह जीएसटी नियम के पालन की अनदेखी के मामले में भी लघु एवं मध्यम उद्योगों को शेष उद्योगों की श्रेणी में ही रखा गया है। जबकि लघु उद्योग के लिए जुर्माने में कमी रहनी चाहिए। ठीक इसी तरह जीएसटी के प्रस्तावित कर में 18 प्रतिशत कर का प्रस्ताव है। लघु उद्योग भारती का कहना है कि यह 9 प्रतिशत ही रहना चाहिए।