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2002 गुजरात दंगे: एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, बड़ी साजिश होने का कोई सबूत नहीं, मामला गर्म रखने की हो रही कोशिश

Wed, 01 Dec 2021 08:48 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 01 Dec 2021 08:48 PM IST
सार

गुजरात में 2002 में हुए दंगों में एसआईटी की ओर से नरेंद्र मोदी समेत अन्य को क्लीन चिट दिए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इन दंगों के समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

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SIT tells Supreme court no material to show larger conspiracy in 2002 Gujarat riots news in Hindi
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

2002 के गुजरात दंगों को लेकर विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इन दंगों में कोई बड़ी साजिश दिखाने के लिए सबूत नहीं हैं। एसआईटी ने कहा कि इन दंगों में राज्य सरकार का हाथ होने की बात कहने के पीछे का मकसद मामले को गर्म रखना है जो कि एक दुर्भाग्यपूर्ण संकेत है।

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गुजरात दंगों में एसआईटी की ओर से तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 64 लोगों को क्लीन चिट दी गई है। एसआईटी के इस कदम को जकिया जाफरी ने चुनौती दी है। जकिया के पति और कांग्रेस नेता एहसान जाफरी की 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में हिंसा के दौरान मौत हो गई थी।
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एसआईटी ने न्यायाधीश एएम खानविलकर, दिनेश माहेश्वरी और सीटी रविकुमार की पीठ से कहा कि जकिया जाफरी की ओर से दंगों में साजिश होने का आरोप लगाने वाली शिकायत एफआईआर में तब्दील नहीं की गई। क्योंकि, अदालत ने एसआईटी को इसे देखने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने को कहा था।
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जकिया जाफरी ने दायर की है 12 हजार पन्नों की विरोध याचिका
यहां एसआईटी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि जकिया जाफरी ने लगभग 12 हजार पन्नों की विरोध याचिका दायर की है और इसे शिकायत मानने के लिए कहा है। रोहतगी ने कहा कि ऐसा करके जकिया इस मामले को गर्म रखना चाहती हैं, यह एक दुर्भावनापूर्ण संकेत है।


एसआईटी ने कहा- राज्य का हाथ नहीं, गुरुवार को अगली सुनवाई
रोहतगी ने पीठ से कहा कि यही कारण है कि इन दंगों में राज्य सरकार का हाथ होने की बात कही जा रही है। इस पर पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा कि यह राज्य की ओर से प्रायोजित दंगा था। इसके बाद इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार के लिए स्थगित कर दी गई।

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