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एसआईआर पर रार: ड्राफ्ट लिस्ट में दिल्ली के 47.7 लाख, महाराष्ट्र के 2 करोड़ वोटर घटे, जानें अन्य राज्यों का हाल

Mon, 31 Aug 2026 06:20 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 31 Aug 2026 06:20 PM IST
सार

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर कई राज्यों में सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली में करीब 47.7 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं दिखेंगे, जबकि महाराष्ट्र में 2.06 करोड़ मतदाताओं को अलग-अलग कारणों से अनकलेक्टेबल श्रेणी में रखा गया है। हालांकि महाराष्ट्र ने साफ किया है कि यह हटाने की अंतिम प्रक्रिया नहीं है। आइए, विस्तार से जानते बाकी राज्यों के क्या हाल है...

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SIR Row Delhi voter count drops by 47.7 Lakh Maharashtra by 2 cr in draft list find situation in other states
एसआईआर की ड्राफ्ट लिस्ट में कितने वोटर प्रभावित? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर देश के कई राज्यों में सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। दिल्ली में 31 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हुई है। करीब 1.45 करोड़ मौजूदा मतदाताओं में से लगभग 47.7 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में दिखाई नहीं देंगे। महाराष्ट्र में भी 2.06 करोड़ मतदाताओं को अनकलेक्टेबल एन्यूमरेशन फॉर्म की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि दोनों मामलों में यह समझना जरूरी है कि ड्राफ्ट सूची अंतिम मतदाता सूची नहीं है।

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दिल्ली में 47.7 लाख नाम क्यों नहीं दिखेंगे?

दिल्ली के 13 जिलों में करीब दो महीने तक एसआईआर की प्रक्रिया चली। जांच के दौरान जिन मतदाताओं का विवरण वर्ष 2002 की एसआईआर सूची से नहीं मिला, उनसे जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। नाम, उम्र या पारिवारिक संबंधों में असामान्य अंतर मिलने पर भी स्पष्टीकरण लिया जा सकता है। 31 अगस्त से 30 सितंबर तक छूटे नामों को लेकर दावा पेश करने का मौका दिया गया है। इसलिए ड्राफ्ट में नाम नहीं होना अंतिम तौर पर मतदाता सूची से बाहर होना नहीं माना जा सकता।

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क्या दिल्ली में दस्तावेज नहीं देने पर नाम कट सकता है?

  • एसआईआर में मतदाता की उम्र और जन्मतिथि के आधार पर दस्तावेजों की जरूरत अलग-अलग हो सकती है।
  • एक जुलाई 1987 से पहले जन्मे व्यक्ति से जन्मतिथि या जन्मस्थान से जुड़ा दस्तावेज मांगा जा सकता है।
  • एक जुलाई 1987 से दो दिसंबर 2004 के बीच जन्मे व्यक्ति को अपने साथ माता या पिता में से किसी एक का संबंधित दस्तावेज देना होगा।
  • दो दिसंबर 2004 के बाद जन्मे व्यक्ति के मामले में स्वयं के साथ माता-पिता दोनों से जुड़े दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
  • आधार कार्ड को अकेले पर्याप्त दस्तावेज नहीं माना गया है।

महाराष्ट्र में 2.06 करोड़ मतदाताओं का क्या मामला है?

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम के मुताबिक, एसआईआर के दौरान 2.06 करोड़ मतदाताओं को ‘अनकलेक्टेबल एन्यूमरेशन फॉर्म’ श्रेणी में रखा गया है। यह संख्या राज्य के कुल 9.78 करोड़ मतदाताओं की करीब 21.15 प्रतिशत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन मतदाताओं को स्थायी रूप से मतदाता सूची से नहीं हटाया गया है। यह केवल ड्राफ्ट सूची से संबंधित स्थिति है। अंतिम सूची जारी होने से पहले दावे और आपत्तियों की पूरी प्रक्रिया होगी।

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महाराष्ट्र में 2.06 करोड़ नाम किन कारणों से प्रभावित हुए?

महाराष्ट्र में 2.06 करोड़ मामलों में 75.52 लाख मतदाता अनुपस्थित या पता नहीं चलने वाले बताए गए हैं। 76.80 लाख मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है। 34.81 लाख नाम मृत मतदाताओं की श्रेणी में रखे गए हैं। 17.63 लाख नाम डुप्लीकेट या दूसरी जगह पंजीकृत होने से जुड़े हैं। इसके अलावा 2.23 लाख मामले अन्य कारणों से हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इन श्रेणियों का निर्धारण घर-घर सत्यापन के आधार पर किया गया।

क्या महाराष्ट्र में छूटे मतदाता दोबारा नाम जुड़वा सकते हैं?

  • महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाताओं से अपील की है कि वे केवल राज्य के आंकड़ों को देखकर चिंतित न हों, बल्कि अपना नाम और विवरण खुद जांचें। यदि नाम नहीं है तो उसे शामिल कराने के लिए आवेदन किया जा सकता है।
  • किसी तरह की गलती होने पर सुधार के लिए प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। नाम हटाए जाने से जुड़ी समस्या होने पर फॉर्म छह के जरिए दोबारा शामिल होने का दावा किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार फॉर्म आठ के जरिए सुधार भी कराया जा सकता है।

क्या अधिकारी खुद भी मान रहे हैं कि ड्राफ्ट सूची में गलती हो सकती है?

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने साफ कहा है कि ड्राफ्ट चरण में 100 प्रतिशत सटीकता का दावा नहीं किया गया है। बूथ लेवल अधिकारियों को मतदाताओं के घर कम से कम एक बार जाने और जरूरत पड़ने पर तीन बार तक प्रयास करने को कहा गया था। लेकिन शहरों में बड़ी संख्या में लोग काम के कारण शाम सात या आठ बजे के बाद घर लौटते हैं। ऐसे में सत्यापन में व्यावहारिक दिक्कतें भी सामने आई हैं। अधिकारियों ने माना है कि कुछ वास्तविक मतदाता भी गलती से इस श्रेणी में आ सकते हैं।

तेलंगाना में एसआईआर को लेकर क्या मांग उठी है?

  • तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने एसआईआर में दावा और आपत्ति दर्ज कराने की अवधि चार सप्ताह बढ़ाने की मांग की है।
  • उन्होंने निर्वाचन आयोग से कहा है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं को दस्तावेज जुटाने और जवाब देने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
  • उन्होंने खास तौर पर अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट श्रेणी में आने वाले मतदाताओं के लिए समय बढ़ाने की मांग की है।
  • उनका कहना है कि कम समय के कारण किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से नहीं छूटना चाहिए।

तेलंगाना ने और क्या सुझाव दिए हैं?

रेवंत रेड्डी ने ग्रामीण इलाकों में ग्राम सभा और शहरी क्षेत्रों में वार्ड समिति की बैठकें कराने का सुझाव दिया है, ताकि मतदाता अपने नाम से जुड़ी कमियों की जानकारी हासिल कर सकें। उन्होंने शहरी जिलों में मदद केंद्र खोलने, अतिरिक्त निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की तैनाती और दावे-आपत्तियों की सुनवाई के लिए अधिक व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि दैनिक मजदूरों और प्रवासी कामगारों के लिए दस्तावेज जुटाना आसान नहीं होता। इसलिए उन्हें जवाब देने के लिए कम से कम तीन से चार सप्ताह का समय मिलना चाहिए।



एसआईआर की मौजूदा तस्वीर में दिल्ली और महाराष्ट्र के आंकड़े सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, लेकिन दोनों जगह ड्राफ्ट सूची को अंतिम सूची नहीं माना गया है। दिल्ली में 47.7 लाख नाम ड्राफ्ट में नहीं दिखने की स्थिति में 30 सितंबर तक दावा किया जा सकता है। महाराष्ट्र में 2.06 करोड़ मतदाताओं के मामले में भी अंतिम निर्णय दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद होगा।

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