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सिक्किम: गृह सचिव से मिले MP इंद्र हांग सुब्बा, लिम्बू-तामांग आरक्षण और सीमा सड़क परियोजनाओं का मुद्दा उठाया
Wed, 08 Jul 2026 11:32 PM IST
अमन तिवारी
एन. अर्जुन, गंगटोक/नई दिल्ली
एन. अर्जुन, गंगटोक/नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 08 Jul 2026 11:32 PM IST
सार
सिक्किम के लोकसभा सांसद इंद्र हांग सुब्बा ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन से मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने भारत-नेपाल सीमा पर रणनीतिक सड़क परियोजनाओं, एसएसबी जवानों के जोखिम भत्ते और सिक्किम विधानसभा में लिम्बू-तामांग समुदाय के लंबित आरक्षण मुद्दे पर जल्द कार्रवाई की मांग की।
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सांसद इंद्र हांग सुब्बा ने गृह सचिव से की मुलाकात
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सिक्किम से लोकसभा सांसद इंद्र हांग सुब्बा ने बुधवार को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन से मुलाकात कर भारत-नेपाल सीमा से जुड़े रणनीतिक सड़क परियोजनाओं, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों के कल्याण तथा सिक्किम विधानसभा में लिम्बू और तामांग समुदायों के लिए सीट आरक्षण के लंबे समय से लंबित मुद्दे को उठाया।
सांसद ने गृह मंत्रालय को सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि सिक्किम की भारत-नेपाल सीमा सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक सड़कों का शीघ्र विकास आवश्यक है। उन्होंने सीमा चौकी नांबू से सीमा स्तंभ संख्या 34/1 होते हुए सीमा चौकी हांसपोखरी तक प्रस्तावित सर्व मौसम सड़क परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क, रसद आपूर्ति और सुरक्षा बलों की परिचालन क्षमता को मजबूती मिलेगी।
इंद्र हांग सुब्बा ने सीमांत और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तैनात एसएसबी की 36वीं और 72वीं बटालियन के जवानों के लिए जोखिम एवं कठिनाई भत्ता (आर1एच1) प्रदान करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इन इलाकों में तैनात जवान अत्यंत प्रतिकूल मौसम, ग्लेशियर और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में उन्हें विशेष भत्ते का लाभ मिलना चाहिए।
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बैठक के दौरान सिक्किम विधानसभा में लिम्बू और तामांग अनुसूचित जनजातियों के लिए सीट आरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। सांसद ने कहा कि वर्ष 2003 में दोनों समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने के बावजूद विधानसभा में उनके लिए आरक्षित सीटों का प्रावधान अब तक नहीं हो सका है। उन्होंने इसे सिक्किम से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक मुद्दों में से एक बताते हुए गृह मंत्रालय से इस दिशा में हो रही प्रगति की जानकारी मांगी।
ये भी पढ़ें: 'साथ रहो या भाजपा में जाओ': TMC के बागी नेताओं पर भड़कीं ममता बनर्जी,बोलीं-विश्वासघात से बढ़े BJP के हौसले
सूत्रों के मुताबिक, गृह सचिव ने सांसद द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से सुना और संबंधित विषयों पर मंत्रालय स्तर पर विचार करने का आश्वासन दिया। इंद्र हांग सुब्बा ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार सीमावर्ती अवसंरचना को मजबूत करने, एसएसबी जवानों के हितों की रक्षा करने और लिम्बू-तामांग समुदायों की लंबे समय से लंबित संवैधानिक मांग के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल करेगी।
उल्लेखनीय है कि लिम्बू और तामांग समुदायों को वर्ष 2003 में अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया गया था, लेकिन सिक्किम विधानसभा में उनके लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण अब तक नहीं हो पाया है। यह मुद्दा पिछले दो दशकों से राज्य की राजनीति और सामाजिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।
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सांसद ने गृह मंत्रालय को सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि सिक्किम की भारत-नेपाल सीमा सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक सड़कों का शीघ्र विकास आवश्यक है। उन्होंने सीमा चौकी नांबू से सीमा स्तंभ संख्या 34/1 होते हुए सीमा चौकी हांसपोखरी तक प्रस्तावित सर्व मौसम सड़क परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क, रसद आपूर्ति और सुरक्षा बलों की परिचालन क्षमता को मजबूती मिलेगी।
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इंद्र हांग सुब्बा ने सीमांत और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तैनात एसएसबी की 36वीं और 72वीं बटालियन के जवानों के लिए जोखिम एवं कठिनाई भत्ता (आर1एच1) प्रदान करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इन इलाकों में तैनात जवान अत्यंत प्रतिकूल मौसम, ग्लेशियर और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में उन्हें विशेष भत्ते का लाभ मिलना चाहिए।
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बैठक के दौरान सिक्किम विधानसभा में लिम्बू और तामांग अनुसूचित जनजातियों के लिए सीट आरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। सांसद ने कहा कि वर्ष 2003 में दोनों समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने के बावजूद विधानसभा में उनके लिए आरक्षित सीटों का प्रावधान अब तक नहीं हो सका है। उन्होंने इसे सिक्किम से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक मुद्दों में से एक बताते हुए गृह मंत्रालय से इस दिशा में हो रही प्रगति की जानकारी मांगी।
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सूत्रों के मुताबिक, गृह सचिव ने सांसद द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से सुना और संबंधित विषयों पर मंत्रालय स्तर पर विचार करने का आश्वासन दिया। इंद्र हांग सुब्बा ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार सीमावर्ती अवसंरचना को मजबूत करने, एसएसबी जवानों के हितों की रक्षा करने और लिम्बू-तामांग समुदायों की लंबे समय से लंबित संवैधानिक मांग के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल करेगी।
उल्लेखनीय है कि लिम्बू और तामांग समुदायों को वर्ष 2003 में अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया गया था, लेकिन सिक्किम विधानसभा में उनके लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण अब तक नहीं हो पाया है। यह मुद्दा पिछले दो दशकों से राज्य की राजनीति और सामाजिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।