Sikkim: भूस्खलन से टूट गया था उत्तरी सिक्किम से संपर्क, बीआरओ ने रिकॉर्ड समय में बनाया
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने गुवाहाटी में बताया कि लगातार बारिश के कारण 14 जुलाई को गंगटोक से चुंगथांग सड़क पर राफांगखोला और लंथाखोला में कई दरारों और भूस्खलन के कारण उत्तरी सिक्किम का सड़क संपर्क टूट गया था...
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पिछले करीब कई दिनों से लगातार हो रही बारिश से उत्तरी सिक्किम में आई भूस्खलन से सड़क का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। बीआरओ की टीम ने न केवल इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सड़क को रिकॉ़र्ड समय में बनाया, बल्कि 1400 से अधिक पर्यटकों को भी बचाया और उनके रहने, खाने और चिकित्सा का पूरा ध्यान रखा।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने गुवाहाटी में बताया कि लगातार बारिश के कारण 14 जुलाई को गंगटोक से चुंगथांग सड़क पर राफांगखोला और लंथाखोला में कई दरारों और भूस्खलन के कारण उत्तरी सिक्किम का सड़क संपर्क टूट गया था। इसके परिणामस्वरूप लाचेन और लाचुंग घाटियों में स्थानीय लोगों और पर्यटकों की आवाजाही बाधित हो गई। लाचेन और लाचुंग घाटी में 1400 से अधिक पर्यटक और 130 वाहन फंस गए थे। बीआरओ के जवानों ने सभी पर्यटकों को बचाया और उनके रहने, खाने और चिकित्सा की व्यवस्था की।
वास्तविक नियंत्रण रेखा तक जाने का महत्वपूर्ण मार्ग
उन्होंने बताया कि इसके कारण आवश्यक आपूर्ति और आपातकालीन सेवाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। यह रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण सड़क मार्ग है। उत्तरी सिक्किम में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बड़ी संख्या में तैनात सेना के जवानों के लिए सड़क खोलना बहुत महत्वपूर्ण था। प्रोजेक्ट स्वस्तिक के कर्मयोगी त्वरित कार्रवाई में जुट गए। महत्वपूर्ण सड़क संचार को बहाल करने के लिए बीआरओ के कुल 160 बहादुरों ने खराब मौसम में भी दिन-रात काम किया। यह कार्य राज्य प्रशासन और सेना के समन्वय से युद्ध स्तर पर किया गया। बीआरओ कर्मयोगियों के अथक प्रयास ने तीन दिनों के रिकॉर्ड समय के भीतर सड़क को खोलना सुनिश्चित किया।
जुलाई में सिक्किम में सबसे अधिक बारिश होती है। यहां हर महीने लगभग 600-700 मिमी वर्षा होती है, लेकिन पिछले एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश ने जन जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।