{"_id":"6a9a840a308272f80908a709","slug":"sikkim-glacial-lakes-40-high-hazard-lakes-identified-16-at-highest-risk-of-glof-2026-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिक्किम में 40 ग्लेशियल झीलें बनीं बड़ा खतरा: 16 पर सबसे ज्यादा जोखिम, क्या फिर आ सकती है 2023 जैसी तबाही?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सिक्किम में 40 ग्लेशियल झीलें बनीं बड़ा खतरा: 16 पर सबसे ज्यादा जोखिम, क्या फिर आ सकती है 2023 जैसी तबाही?
Fri, 04 Sep 2026 02:10 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गंगटोक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गंगटोक
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 04 Sep 2026 02:10 PM IST
सार
सिक्किम में 40 ग्लेशियल झीलों की पहचान हाई-हजार्ड के तौर पर हुई है। इनमें 16 को सबसे ज्यादा जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। ग्लेशियरों के पिघलने से झीलों का आकार बढ़ रहा है और इनके अचानक फटने पर नीचे बसे इलाकों में भारी तबाही हो सकती है। 2023 में सिक्किम ऐसी आपदा झेल चुका है। इन झीलों से कितना खतरा है? सरकार क्या तैयारी कर रही है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विज्ञापन
ग्लेशियल आउटबर्स्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमालयी राज्यों में ग्लेशियरों के पिघलने और उनसे बन रही झीलों ने खतरे की नई घंटी बजा दी है। सिक्किम में 40 ऐसी ग्लेशियल झीलों की पहचान हुई है, जिन्हें हाई-हजार्ड यानी ज्यादा खतरे वाली माना गया है। इनमें 16 झीलें सबसे ज्यादा जोखिम वाली श्रेणी में हैं। अगर इनमें से कोई झील अचानक फटती है तो नीचे बसे इलाकों में तेज पानी पहुंच सकता है और बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सिक्किम में कितनी झीलें सबसे ज्यादा खतरे में हैं?
सिक्किम के अधिकारियों के अनुसार, 40 हाई-हजार्ड ग्लेशियल झीलों में 16 को कैटेगरी ए यानी सबसे ज्यादा जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। दो झीलें कैटेगरी बी यानी हाई रिस्क और नौ कैटेगरी सी यानी मध्यम से कम जोखिम वाली हैं। 13 झीलों को अभी किसी श्रेणी में नहीं रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक ग्लेशियल झीलें ग्लेशियरों के पिघलने से जमा हुए पानी से बनती हैं। जब पानी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है या भूकंप जैसे कारणों से प्राकृतिक बांध टूटता है तो ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी जीएलओएफ आ सकती है।
विज्ञापन
क्या होती है ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड?
- हिमालयन रीजन में ग्लेशियर के नीचे वाले हिस्से में उसके पिघलने वाले पानी से बड़ी लेक तैयार हो जाती है
- अधिकता की वजह से कभी-कभी पानी का जमाव बाढ़ के रूप में अपनी सीमाएं तोड़ देता है
2023 में सिक्किम में क्या हुआ था?
सिक्किम पहले ही ऐसी आपदा का खामियाजा भुगत चुका है। अक्टूबर 2023 में आई ग्लेशियल झील फटने की घटना में कम से कम 60 लोगों की मौत हुई थी। मंगन, गंगटोक, पाकयोंग और नामची जिलों में भारी नुकसान हुआ था। इस आपदा में एक बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा चुंगथांग बांध भी नष्ट हो गया था। इसी घटना ने राज्य में ग्लेशियल झीलों से जुड़े खतरे को लेकर तैयारी मजबूत करने की जरूरत साफ कर दी।
विज्ञापन
सरकार खतरे को रोकने के लिए क्या कर रही है?
सिक्किम में झीलों पर नजर रखने के लिए रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को फरवरी 2025 में जीएलओएफ के खतरे का आकलन और उससे बचाव के अध्ययन के लिए नोडल विभाग बनाया गया था। राज्य देश का पहला समर्पित जीएलओएफ जोखिम न्यूनीकरण प्रोटोकॉल तैयार करने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके तहत पानी का स्तर, पानी के बहाव, झील की गहराई, भूगर्भीय स्थिति और बाढ़ के संभावित रास्तों का अध्ययन किया जा रहा है।किन झीलों पर खास नजर है?
- अधिकारियों के मुताबिक सभी झीलों के लिए एक जैसा बचाव तरीका लागू नहीं किया जा सकता।
- इसलिए ल्होनाक कॉम्प्लेक्स, शाको छो झील और गुरुडोंगमार कॉम्प्लेक्स के लिए अलग-अलग योजनाएं तैयार की गई हैं।
- शाको छो को सिक्किम सरकार ने जीएलओएफ के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना है।
- इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजी गई है और शुरुआती परियोजना रिपोर्ट जल शक्ति मंत्रालय को दी गई है।
- ल्होनाक कॉम्प्लेक्स में बाढ़ का पानी रोकने के लिए डोलमा सांपा के पास ढांचे की योजना पर केंद्रीय जल आयोग काम कर रहा है।
- गुरुडोंगमार में झील के निकास पर मोरेन प्लग दीवार बनाने का प्रस्ताव है।