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Caste Census: कर्नाटक में 22 सितंबर से नई जाति जनगणना का एलान; मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इसकी वजह भी बताई

Fri, 12 Sep 2025 01:48 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 12 Sep 2025 01:48 PM IST
सार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कर्नाटक में 22 सितंबर से नई जाति जनगणना का एलान किया है। उन्होंने कहा कि पिछली रिपोर्ट स्वीकार नहीं की गई है। इस वजह से हमने नया सर्वेक्षण कराने का फैसला किया है। मधुसूदन (अध्यक्ष, बीसी आयोग) और पांच सदस्य सात करोड़ लोगों का डेटा जानने के लिए एक नया सर्वेक्षण करेंगे। मधुसूदन आयोग का सर्वेक्षण 22 सितंबर से 7 अक्तूबर, 2025 के बीच पूरा हो जाएगा।

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Siddaramaiah announces fresh caste census in Karnataka from September 22, says didn't accept previous report
सिद्धारमैया, सीएम, कर्नाटक - फोटो : ANI

विस्तार

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को घोषणा की कि कर्नाटक 22 सितंबर से 7 अक्तूबर के बीच एक नया सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण कराएगा। उन्होंने कहा कि 2015 में हुई जाति जनगणना को सरकार ने स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पिछली जनगणना के एक दशक बीत जाने के बाद समाज की वर्तमान वास्तविकताओं को समझने के लिए एक नया सर्वेक्षण आवश्यक हो गया है।

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मुख्यमंत्री ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, 'समाज में कई धर्म और जातियां हैं। विविधता और असमानता भी है। संविधान कहता है कि सभी समान होने चाहिए और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए।' उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सर्वेक्षण असमानताओं को दूर करने और लोकतंत्र की मजबूत नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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सात करोड़ परिवारों की पूरी आबादी को शामिल किए जाने की उम्मीद
कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से किए जाने वाले इस सर्वेक्षण में राज्य के लगभग सात करोड़ परिवारों की पूरी आबादी को शामिल किए जाने की उम्मीद है। प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट घरेलू पहचान पत्र (यूआईडी) स्टिकर दिया जाएगा, जिसमें अब तक 1.55 करोड़ स्टिकर लगाए जा चुके हैं। परिवारों की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षिक स्थिति का विवरण एकत्र करने के लिए 60 प्रश्नों वाली एक प्रश्नावली आयोजित की जाएगी।

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  • इस सर्वेक्षण के लिए दशहरे की छुट्टियों के दौरान 1.85 लाख सरकारी शिक्षकों को तैनात किया जाएगा। 
  • प्रत्येक को 20,000 रुपये तक का मानदेय मिलेगा, जिससे शिक्षकों के पारिश्रमिक के लिए कुल आवंटन 325 करोड़ रुपये हो जाएगा। 
  • राज्य ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए 420 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं, जो 2015 की जाति जनगणना के दौरान खर्च किए गए 165 करोड़ रुपये से काफी अधिक है।
  • सटीकता में सुधार के लिए तकनीकी सुरक्षा उपायों का उपयोग किया जा रहा है। 
  • प्रत्येक घर को बिजली मीटर नंबरों से जियो-टैग किया जाएगा और राशन कार्ड और आधार विवरण मोबाइल नंबरों से जोड़े जाएंगे। 
  • जो लोग गणनाकर्ताओं को जाति विवरण नहीं बताना चाहते हैं, उनके लिए एक समर्पित हेल्पलाइन (8050770004) पर कॉल करके या ऑनलाइन जानकारी देने के विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं।


नागरिकों से पूर्ण सहयोग देने का आग्रह
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने नागरिकों से पूर्ण सहयोग देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'राज्य के प्रत्येक नागरिक से मेरा विनम्र अनुरोध है कि कृपया इस सर्वेक्षण में भाग लें। कृपया गणनाकर्ताओं द्वारा पूछे गए सभी प्रश्नों का उत्तर सच्चाई और अपनी पूरी जानकारी के साथ दें। आपकी तैयारी में मदद के लिए आशा कार्यकर्ता आवेदन पत्र देने के लिए पहले ही आपके घर आएंगी।'

मधुसूदन नाइक की अध्यक्षता वाले आयोग को जिम्मा
मधुसूदन नाइक की अध्यक्षता वाले आयोग को वैज्ञानिक और समावेशी तरीके से सर्वेक्षण करने का काम सौंपा गया है। अंतिम रिपोर्ट दिसंबर 2025 तक प्रस्तुत होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा, 'आजादी के दशकों बाद भी असमानता बनी हुई है। अपने लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए हमें इन असमानताओं को दूर करना होगा। यह सर्वेक्षण सभी के लिए प्रभावी कल्याणकारी कार्यक्रम तैयार करने के लिए आवश्यक आंकड़े प्रदान करेगा।'

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