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Shubhanshu Shukla: 'अंतरिक्ष से पृथ्वी पर कोई सीमा दिखाई नहीं देती...', शुभांशु के शब्द पढ़ेंगे 5वीं के बच्चे

Tue, 22 Jul 2025 10:40 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 22 Jul 2025 10:40 PM IST
सार

एक्सिओम मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में कदम रखने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने वहां पहुंचकर जो कहा, वो अब पाठ्यपुस्तक का हिस्सा बन गया है। 

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Shubhanshu Shukla's quote featured in new NCERT book
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, पीएम नरेंद्र मोदी - फोटो : एएनआई

विस्तार

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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर पहुंचने वाले पहले भारतीय शुभांशु शुक्ला को हाल ही में प्रकाशित एनसीईआरटी की कक्षा पांच की ‘पर्यावरण अध्ययन’ से जुड़ी नयी पाठ्यपुस्तक में शामिल किया गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की इस पुस्तक में अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने के बारे में उनके प्रेरित करने वाले कथन को शामिल किया गया है।

एनसीईआरटी ने इस बात को पर्यावरण अध्ययन से जुड़ी पांचवीं कक्षा की कि किताब के पृथ्वी, हमारा साझा घर में शामिल किया है। पीएम मोदी के साथ बातचीत के दौरान अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने के अपने पहले अनुभव को याद करते हुए शुक्ला ने कहा था, पृथ्वी को बाहर से देखने के बाद, मन में पहला विचार यह आया कि पृथ्वी पूरी तरह से एक दिखती है; बाहर से कोई सीमा दिखाई नहीं देती। ऐसा लगता है कि कोई सीमा नहीं है, कोई राज्य नहीं है, कोई देश नहीं है। हम सभी मानवता का हिस्सा हैं, और पृथ्वी हमारा एक घर है, और हम सभी इसमें हैं।।
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भारतीय वायुसेना के 39 पायलट ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा पूरी की। एक्सिओम-4 मिशन के तहत यह एक वाणिज्यिक अंतरिक्ष उड़ान थी, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और ‘नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ (नासा) द्वारा समर्थन प्राप्त था।

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पांचवीं कक्षा की यह किताब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एक बड़े शैक्षणिक बदलाव का हिस्सा है। यह विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन को एक ही साथ जोड़ती है जिसका उद्देश्य अवलोकन, अन्वेषण और नैतिक तर्क को बढ़ावा देना है। यह कहानियों, व्यावहारिक गतिविधियों और वास्तविक दुनिया के संबंधों के माध्यम से विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और पर्यावरण के बारे में छात्रों को शिक्षित करती है।

एक्सिओम 4 मिशन के बारे में बिंदुवार तरीके से जानिए-
  • इस मिशन की शुरुआत 2024 के अंत में हुई, जब एक्सिओम-4 मिशन की घोषणा की गई थी। यह एक साझा वाणिज्यिक अंतरिक्ष उड़ान थी, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा दोनों का समर्थन हासिल था।  मिशन को 2025 की शुरुआत में लॉन्च किया जाना था, लेकिन लॉन्च से पहले तकनीकी चीजों की जांच करनी पड़ी और फ्लोरिडा के केनेडी अंतरिक्ष स्टेशन में मौसम भी ठीक नहीं था। इन वजहों से मिशन कई बार टल गया था।
     
  • आखिरकार, 25 जून 2025 को फ्लोरिडा के केनेडी अंतरिक्ष स्टेशन से स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए यह मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ। फिर 26 जून को अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पहुंच गए और उन्होंने वहां 18 दिनों का अपना सफर शुरू किया।
     
  • इस दौरान शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में भारत के सात वैज्ञानिक प्रयोग किए, जो माइक्रोग्रैविटी यानी बहुत ही कम गुरुत्वाकर्षण वाली स्थिति में किए गए। इनमें मूंग और मेथी के बीजों को उगाने की कोशिश, स्टेम सेल (कोशिका) पर शोध और माइक्रोएल्गी यानी सूक्ष्म शैवाल से जुड़े प्रयोग शामिल थे। आईएसएस पर रहते हुए शुभांशु शुक्ला ने शून्य गुरुत्वाकर्षण में पानी के बुलबुले कैसे बनते हैं, यह दिखाया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी प्रयोग किया कि जब कोई अंतरिक्ष यात्री स्क्रीन पर काम करता है, तो उस दौरान उसके दिमाग पर कितना असर पड़ता है, यानी दिमाग पर कितना बोझ महसूस होता है (जिसे कॉग्निटिव लोड कहते हैं)।
     
  • मिशन के दौरान शुभांशु शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, स्कूल के छात्रों और इसरो के वैज्ञानिकों से रेडियो और वीडियो कॉल के जरिए बात की। यह बातचीत मिशन का एक खास हिस्सा था, जिससे आम लोगों और छात्रों तक अंतरिक्ष यात्रा की जानकारी पहुंचाई गई। 13 जुलाई को एक विदाई समारोह रखा गया, जिसमें एक्सपीडिशन 73 के अंतरिक्ष यात्री मौजूद थे। इस समारोह में शुभांशु शुक्ला ने इसरो और अपने सभी साथियों का धन्यवाद किया।

     
  • इसके बाद 14 जुलाई को ड्रैगन ग्रेस अंतरिक्ष यान ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से दूरी बना ली। सभी जरूरी काम और प्रयोग पूरे करने के बाद 15 जुलाई 2025 को शुभांशु शुक्ला और उनकी टीम कैलिफोर्निया के समुद्र तट के पास सुरक्षित उतर गई और धरती पर वापस आ गई। यह मिशन भारत के लिए एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम है। इससे दुनिया के सामने देश की वैज्ञानिक ताकत दिखी है और भविष्य में अंतरिक्ष से जुड़ी खोज और शोध के लिए नई उम्मीदें जगी हैं।

Shubhanshu Shukla: 'अंतरिक्ष से पृथ्वी पर कोई सीमा दिखाई नहीं देती...', शुभांशु के ये शब्द पढ़ेंगे 5वीं के बच्चे
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