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शिवसेना ने कहा- अगर ममता भी जय श्रीराम कह कर संबोधन शुरू करतीं तो दांव उलटा पड़ जाता

Mon, 25 Jan 2021 09:14 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 25 Jan 2021 09:14 AM IST
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Shivsena on Mamta's refusal to speak after 'Jai Sree Ram' chants at Netaji event
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-ममता बनर्जी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

पश्चिम बंगाल में इस साल चुनाव होने हैं। ऐसे में राज्य में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा जनता को अपनी तरफ करने की पुरजोर कोशिश कर रही हैं। इसी बीच शुक्रवार को नेताजी सुभाष बोस की 125वीं जयंती पर दोनों पार्टियों ने शक्ति प्रदर्शन किया। इसी दौरान सरकारी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंच पर उपस्थिति के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपना वक्तव्य देने की लिए खड़ी हुईं तब उपस्थित भीड़ ने 'जय श्रीराम' के नारे लगाए। जिसे ममता ने अपना अपमान करार दिया। इसे लेकर शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में उन्हें सलाह दी है।

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शिवसेना ने लिखा, 'हमारा विचार है कि 'जय श्रीराम' के नारों से ममता को चिढ़ना नहीं चाहिए। उल्टे उनके सुर में सुर मिलाया होता तो दांव उलटा भी पड़ सकता था। लेकिन हर कोई अपने वोट बैंक को ध्यान में रखता है। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को हराना ही है और पश्चिम बंगाल में भाजपा का विजय ध्वज लहराने की जिद से भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व बंगाल के मैदान में उतरा है। टैगोर की तरह दाढ़ी बढ़ा चुके प्रधानमंत्री मोदी भी कल कोलकाता आए थे।'
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शिवसेना ने धार्मिक अलगाववाद के लिए ममता को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, 'जनता का आदेश स्वीकारना ही पड़ता है लेकिन जनता का रुझान अपनी ओर लाने के लिए जिस प्रकार के प्रयास हमारे लोकतंत्र में किए जाते हैं वे असहनीय हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार की तरह पश्चिम बंगाल में भाजपा ने धार्मिक अलगाववाद शुरू किया है। इसके लिए कुछ हद तक ममता बनर्जी जिम्मेदार हैं। अति सेक्युलरवाद और मुस्लिमों के प्रति असीम झुकाव बहुसंख्यक हिंदुओं को खटकता है।'
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शिवसेना का कहना है कि ममता की आवाज लोगों तक नहीं पहुंच रही है। पार्टी ने सामना में लिखा, 'पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के पहले दुर्गा पूजा और विसर्जन को लेकर भाजपा ने झूठ प्रचारित किया और ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उनकी आवाज लोगों तक नहीं पहुंच रही थी। भाजपा के प्रचार का गुप्त मिशन होता है। ममता और अन्य लोगों की बात खुले मन की होती है। लोकसभा में भाजपा ने 14 सीटें जीतीं। यह बात ममता दीदी के लिए चिंताजनक है। लेकिन बंगाल की यह बाघिन सड़कों पर लड़नेवाली है और वह लड़ती रहेगी।'


शिवसेना ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, 'सवाल यह है कि जैसे ईडी आदि की ओर से हर राज्य में जाकर विरोधियों पर छापे मारे जाते हैं, वैसे छापे केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी ने बंगाल के बम कारखानों पर क्यों नहीं मारे? अंतत: राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। बम के कारखाने कहां हैं और उस पर केंद्र ने क्या कार्रवाई की? सांसदों को संसद में इस बात का जवाब मांगना चाहिए। पश्चिम बंगाल के महामहिम राज्यपाल जगदीप धनखड़ की क्या बात करें? महाराष्ट्र के राजभवन में भाजपाप्रेम में जो कुछ चल रहा है, उससे कहीं ज्यादा कोलकाता राजभवन में चल रहा है।'

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