अमित शाह का एक कॉल और 'भारत बंद' से शिवसेना ने बनाई दूरी
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पेट्रोल डीजल पर कांग्रेस के भारत बंद में कई राजनीतिक पार्टियां साथ दे रही हैं तो कई पार्टियों ने ऐन वक्त पर गच्चा दे दिया है। महाराष्ट्र में अपनी पकड़ और असर रखने वाली शिवसेना ने अचानक भारत बंद में शामिल होने से मना कर दिया है।
कांग्रेस ने शिवसेना से तेल की बढ़ती कीमतों पर सरकार के खिलाफ देश भर में विरोध-प्रदर्शन के लिए शिवसेना का भी समर्थन मांगा था। शिवसेना राज्य और केंद्र दोनों में अपने सहयोगी दल भाजपा की ज्यादातर मसलों पर घोर निंदा करती नजर आती है। लेकिन भारत में शामिल ना होने के पीछे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का एक फोन कॉल बताया जा रहा है।
एक अखबार के अनुसार, शिवसेना एक वरिष्ठ नेता ने बताया, 'अमित शाह की तरफ से फोन आया था। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी कॉल की थी। अब हमने खुले रूप से बंद को समर्थन न देने का निर्णय लिया है। हम खुद से ही पेट्रोल की बढ़ी कीमतों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं और बीजेपी सरकार की नीतियों का मुखर विरोध भी कर रहे हैं।'
सूत्रों के मुताबिक पार्टी के कुछ सीनियर नेता और कार्यकर्ता भी चाहते थे कि भारत बंद में कांग्रेस और एनसीपी का शिवसेना समर्थन करे। लेकिन बंद से ठीक एक दिन पहले दिल्ली से भाजपा अध्यक्ष और मुंबई में महाराष्ट्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने फोन कॉल कर उन्हे ऐसा करने से मना किया जिसपर शिवसेना को अपने कदम पीछे करने पड़े।
कांग्रेस के अनुरोध को शिवसेना ने ठुकरा दिया और एक प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने संवाददाताओं को बताया कि कांग्रेस ने शिवसेना से बंद में शामिल होने का आग्रह किया था। चव्हाण ने कहा कि हमें उम्मीद है कि शिवसेना हमारा समर्थन करेगी क्योंकि तेल कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ अब खुलकर आने के लिए मैंने व्यक्तिगत तौर पर शिवसेना के राज्यसभा सदस्य संजय राउत से बात की है और हमे उनके जवाब का इंतजार है।
वहीं,कांग्रेस के आग्रह पर जवाब देते हुए संजय राउत ने भी बताया कि शिवसेना बंद में भाग नहीं लेगी जबकि राज ठाकरे की मनसे ने कहा कि वह बंद में हिस्सा लेगी। बताया जा रहा है कि शिवसेना ने पार्टी को कांग्रेस के भारत बंद को समर्थन देने से गठबंधन की गरिमा को बनाये रखने के लिए किया है। महाराष्ट्र और केंद्र दो ही सरकार में वो सहयोगी दल के तौर पर शामिल हैं।
कांग्रेस के मुताबिक इस बंद के जरिए केंद्र सरकार को जगाने के लिए 21 राजनीतिक पार्टियों का साथ उन्हे मिल रहा है। कांग्रेस ने दावा किया है कि भारत बंद को समाजवादी पार्टी , बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, डीएमके, राष्ट्रीय जनता दल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, जनता दल सेक्युलर, राष्ट्रीय लोकदल, झारखंड मुक्ति मोर्चा, एमएनएस और कई अन्य दल समर्थन कर रहे हैं।