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शिवसेना सीएम पद पर अड़ी तो अकेले लड़ेगी भाजपा, स्वीकार नहीं ढाई साल का फार्मूला 

Sat, 15 Jun 2019 07:09 AM IST
Avdhesh Kumar हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Sat, 15 Jun 2019 07:09 AM IST
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Shiv Sena will fight for CM post, BJP will fight alone

इस साल के अंत में होने जा रहे महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीते चुनाव की पुनरावृत्ति हो सकती है। शिवसेना अगर ढाई-ढाई साल के लिए दोनों दलों के सीएम के फार्मूले पर अड़ी तो बीते चुनाव की तरह भाजपा अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला कर सकती है।

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दबाव बनाने के लिए भले ही शिवसेना आधे कार्यकाल के लिए अपना सीएम मांग रही है, मगर पार्टी उसे विधानसभा की आधी सीटें भी देने के लिए तैयार नहीं है।

खटास भरे 5 साल के दौर के बाद दोनों दलों के बीच लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन हो तो गया, मगर नतीजे के बाद नए सिरे से मनमुटाव शुरू हुआ है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में फिर से पुराना और एक ही बर्थ मिलने से शिवसेना नाखुश है।
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इस बीच पार्टी प्रमुख उद्घव ठाकरे ने दबाव बनाने के लिए न सिर्फ फिर से अयोध्या की यात्रा की, बल्कि पार्टी ने चुनाव के बाद ढाई साल के लिए शिवसेना का सीएम बनाने की मांग कर दी है। इसके अलावा पार्टी भी से 288 सीटों में से आधी सीटों पर दावेदारी कर रही है।
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राज्य से जुड़े भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक शिवसेना की ढाई साल के लिए अपना सीएम बनाने की बात तो दूर पार्टी उसे विधानसभा की आधी सीटें भी नहीं देगी। विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव में भी लोकप्रियता और जमीनी पकड़ के मामले में शिवसेना भाजपा से बहुत पीछे है।

फिर राज्य में कांग्रेस के नेता कार्यकर्ता बड़ी संख्या में भाजपा में शामिल हो रहे हैं। बीच का रास्ता तो यही हो सकता है कि विवाद बढने की स्थिति में भाजपा शिवसेना को डिप्टी पीएम पद का प्रस्ताव देगी। इसी रणनीति के तहत भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व शिवसेना की दबाव बनाने की कोशिशों के बीच बेपरवाह है।


एनसीपी-कांग्रेस पर निगाहें

भाजपा के रणनीतिकारों को लगता है कि उसे बीते चुनाव की तरह ही इस विधानसभा चुनाव में भी अकेले उतरना पड़ सकता है। यही कारण है कि केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य संगठन को युद्घ स्तर पर कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं-कार्यकर्ताओं को साधने का निर्देश दिया है। नतीजे आने के बाद थोक के भाव में कांग्रेस के विधायक और नेता भाजपा में शामिल हुए हैं। रणनीतिकारों का मानना है कि अगर भाजपा कांग्रेस के जमीनी आधार में बड़ा सेंध लगा पाई तो राज्य में उसे किसी सहयोगी की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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