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महाराष्ट्र में कांग्रेस की सहयोगी शिवसेना ने किया नागरिकता संशोधन बिल पेश करने का समर्थन
Mon, 09 Dec 2019 07:56 PM IST
अमित मंडल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Mon, 09 Dec 2019 07:56 PM IST
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उद्धव ठाकरे
- फोटो : amar ujala (file photo)
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लोकसभा में आज गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन बिल पेश किया। इसे लेकर सरकार और विपक्ष में जमकर नोंकझोक भी हुई। सदन में बिल पेश करने पर वोटिंग हुई जिसमें महाराष्ट्र में कांग्रेस की सहयोगी शिवसेना ने भी इसके पक्ष में वोटिंग की। पक्ष में कुल 293 और विपक्ष में 82 वोट पड़े।
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Lok Sabha: 293 'Ayes' in favour of introduction of #CitizenshipAmendmentBill and 82 'Noes' against the Bill's introduction, in Lok Sabha pic.twitter.com/z1SbYJbvcz
— ANI (@ANI) December 9, 2019विज्ञापन
‘नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019’ पर चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना सांसद विनायक राउत ने कहा कि उनकी पार्टी इस पक्ष में है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को यहां सम्मान दिया जाए, लेकिन इसमें श्रीलंका में पीड़ा झेलने वाले तमिलों को भी शामिल किया जाए।
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उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से कितने लोग भारत में आए और इस विधेयक के पारित होने के बाद कितने लोगों को नागरिकता दी जाएगी। राउत ने कहा कि देश बहुत मुश्किलों का सामना कर रहा है और ऐसे में इन लोगों को नागरिकता देने से देश पर कितना बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को नागरिकता दी जाएगी उन्हें 25 साल तक मताधिकार नहीं मिलना चाहिए।
कांग्रेस कर रही विरोध
शिवसेना का बिल को पेश करने के पक्ष में वोटिंग करना इस मायने में अहम है क्योंकि हाल ही में उसने महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई है। उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से सीएम पद संभाला है। बिल पेश करने से पहले ही शिवसेना के रुख को लेकर तमाम कयास लग रहे थे। लेकिन वोटिंग के बाद उसका रुख साफ हो गया। कांग्रेस इस बिल का पुरजोर विरोध कर रही है।
आज लोकसभा में इस बिल को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ। कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी सहित विपक्ष के कई नेताओं ने इसका विरोध किया। चौधरी ने कहा कि ये बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इसका विरोध करते हुए कहा कि ये संविधान के खिलाफ है।
लोकसभा में बिल का पास होना तय है क्योंकि भाजपा के पास 303 सांसद हैं।