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शिरुई हिल्स पर झंडा विवाद: मैतेई संगठन अरामबाई तेंगोल ने भड़काने के आरोपों को किया खारिज, कही यह बात

Sat, 24 May 2025 08:56 PM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, इंफाल
अमर उजाला ब्यूरो, इंफाल Published by: शिव शुक्ला Updated Sat, 24 May 2025 08:56 PM IST
सार

यह विवाद उस समय भड़का जब शुक्रवार रात एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें अरामबाई तेंगोल के सदस्य पारंपरिक पोशाक में मैतेई का सात रंगों वाला झंडा (सालाई तरेत) लिए हुए दिखाई दिए और "लॉन्ग लिव मणिपुर" और "मदर शिरुई बी ब्लेस्ड" जैसे नारे लगाए।

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Shirui Hills flag row: Meitei organisation Arambai Tenggol rejects provocation claims
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

मणिपुर के तांगखुल नगा संगठनों द्वारा मैतेई के सात रंगों वाले झंडे के शिरुई हिल की चोटी पर फहराने और नारेबाज़ी को लेकर किए गए तीव्र विरोध के बाद, मैतेई संगठन अरामबाई तेंगोल ने शनिवार को कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री से अनावश्यक भ्रम पैदा हुआ है। उन्होंने इस कृत्य को किसी प्रकार की क्षेत्रीय दावेदारी या उकसावे के रूप में न लेने की अपील की। उल्लेखनीय है कि दो वर्षों के बाद उखरुल में शिरुई लिली महोत्सव का आजाग 20 मई से हुआ था, जिसका उद्घाटन राज्यपाल अजय भल्ला ने किया था।

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यह विवाद उस समय भड़का जब शुक्रवार रात एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें अरामबाई तेंगोल के सदस्य पारंपरिक पोशाक में मैतेई का सात रंगों वाला झंडा (सालाई तरेत) लिए हुए दिखाई दिए और "लॉन्ग लिव मणिपुर" और "मदर शिरुई बी ब्लेस्ड" जैसे नारे लगाए। यह तस्वीर सबसे पहले एक फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई थी, जिसमें लिखा था, हम, अरामबाई तेंगोल, सलाइ तरेत झंडा फहराकर यह साहसिक घोषणा करते हैं कि अरामबाई तेंगोल हमारी भूमि के हर कोने में मजबूत खड़ा है। यह हमारी पवित्र भूमि है, मणिपुर की भूमि पर किसी अन्य समुदाय को दावा करने का कोई अधिकार नहीं है।
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इसके बाद तांगखुल नगा समुदाय ने इसे उकसावे वाला और अपमानजनक बताया।इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, अरामबाई तेंगोल ने बयान जारी कर कहा, तांगखुल कतमनाओ साकलोंग को फेसबुक पर फैली भ्रामक जानकारी ने गुमराह किया है। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले स्रोत की सत्यता की पुष्टि करना अनिवार्य है। संगठन ने यह भी कहा, ऐसी घटनाओं की गलत व्याख्या केवल विभाजन को बढ़ावा देती है और यह स्पष्ट है कि कुछ तत्व मैतेई और नागा समुदायों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बाधित करना चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि दो वर्षों के बाद उखरुल में शिरुई लिली महोत्सव का आजाग 20 मई से हुआ था, जिसका उद्घाटन राज्यपाल अजय भल्ला ने किया था।

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