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सुप्रीम कोर्ट: शिंदे सरकार ने अर्नब गोस्वामी के खिलाफ याचिका ली वापस, तत्कालीन MVA सरकार ने दायर की थी अर्जी

Mon, 21 Nov 2022 06:15 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Mon, 21 Nov 2022 06:15 PM IST
सार

हाई कोर्ट ने 2020 में समाचार कार्यक्रमों के दौरान कथित रूप से भड़काऊ टिप्पणियां करने के लिए गोस्वामी के खिलाफ दायर दो प्राथमिकियों की जांच पर रोक लगा दी थी।

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Shinde govt withdraws plea from SC challenging HC order on FIRs against Arnab Goswami
अर्नब गोस्वामी (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार को बॉम्बे हाई कोर्ट के 2020 के आदेश के खिलाफ पिछली उद्धव ठाकरे सरकार के दौरान राज्य द्वारा दायर एक अपील को वापस लेने की अनुमति दे दी। इसमें रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणिया मामले में दायर दो एफआईआर में जांच को निलंबित कर दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने महाराष्ट्र के वकील की दलीलों पर ध्यान दिया कि वह बॉम्बे हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर याचिका को वापस लेना चाहते हैं।

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हाई कोर्ट के आदेश को ठाकरे सरकार ने दी थी चुनौती 
हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील शीर्ष अदालत में तब दायर की गई थी जब राज्य में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार का शासन था। शिवसेना में विद्रोह के बाद 30 जून को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने इसे बदल दिया था। राज्य सरकार के वकील ने सोमवार को संक्षिप्त सुनवाई की शुरुआत में पीठ से कहा कि हाई कोर्ट का आदेश एक अंतरिम आदेश है। मेरे पास इसे वापस लेने का निर्देश है। खंडपीठ ने आदेश दिया कि इसे वापसी के रूप में खारिज किया जाता है। 
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गोस्वामी के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी का मामला था दर्ज
हाई कोर्ट ने 2020 में समाचार कार्यक्रमों के दौरान कथित रूप से भड़काऊ टिप्पणियां करने के लिए गोस्वामी के खिलाफ दायर दो प्राथमिकियों की जांच पर रोक लगा दी थी। प्राथमिकी पालघर लिंचिंग की घटना के बारे में टीवी कार्यक्रमों में गोस्वामी की टिप्पणियों और कोविड लॉकडाउन के दौरान मुंबई के बांद्रा इलाके में बड़ी संख्या में प्रवासियों के जमा होने से संबंधित थीं। 26 अक्टूबर, 2020 को शीर्ष अदालत ने कहा कि कुछ लोगों को अधिक तेजी से निशाना बनाया जाता है और उन्हें अधिक सुरक्षा की आवश्यकता होती है। महाराष्ट्र सरकार ने गोस्वामी के खिलाफ पुलिस जांच पर रोक लगाने के उच्च न्यायालय के फैसले का विरोध किया था।
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शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार द्वारा दायर अपील पर गोस्वामी और अन्य से जवाब मांगा था। 30 जून, 2020 के अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा कि गोस्वामी की टिप्पणियों ने कांग्रेस और उसके तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी को निशाना बनाया, लेकिन उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया जिससे विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच सार्वजनिक वैमनस्य पैदा हो या हिंसा भड़के। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा था कि भारत की स्वतंत्रता तब तक सुरक्षित रहेगी जब तक कि पत्रकार प्रतिशोध के खतरे से डरे बिना सत्ता से बात कर सकें। जब समाचार मीडिया जंजीरों में जकड़ा हो तो स्वतंत्र नागरिक मौजूद नहीं रह सकते हैं।  

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