{"_id":"657c6e0151e967b0280f1b2a","slug":"shanghai-cooperation-organization-joint-anti-terrorist-exercise-conduct-of-the-member-states-2023-12-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"शंघाई सहयोग संगठन: 'संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभ्यास' का आयोजन, सदस्य देशों के अधिकारी हुए शामिल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
शंघाई सहयोग संगठन: 'संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभ्यास' का आयोजन, सदस्य देशों के अधिकारी हुए शामिल
Fri, 15 Dec 2023 08:47 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Fri, 15 Dec 2023 08:47 PM IST
सार
शंघार्ई सहयोग संगठन का उद्देश्य आतंकवादी, अलगाववादी और चरमपंथी उद्देश्यों में इंटरनेट के उपयोग की पहचान करना और उसका खात्मा करना है। सदस्य देशों के अधिकारियों ने संयुक्त आतंकवाद विरोध अभ्यास आयोजित किया।
विज्ञापन
SCO समिट की बैठक (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
विस्तार
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सदस्य देशों के अधिकारियों ने क्षेत्रीय आतंकवाद विरोध संरचना की कार्यकारी समिति के सहयोग से एक संयुक्त आतंकवाद विरोध अभ्यास आयोजित किया। बता दें शंघार्ई सहयोग संगठन का उद्देश्य आतंकवादी, अलगाववादी और चरमपंथी उद्देश्यों में इंटरनेट के उपयोग की पहचान करना और उसका खात्मा करना है।
SCO समूह के देशों में भारत का बड़ा महत्व
भारत के लिए एससीओ का महत्व बहुत है। इसमें भारत को दक्षिण एशिया में स्थान देने के साथ-साथ अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने का मौका भी मिलता है। भारत एससीओ संगठन के देशों में एक महत्वपूर्ण देश के रूप में उभरा है। इस संगठन में चीन और रूस प्रमुख देश हैं। इस संगठन को नाटो के विकल्प के तौर पर भी देखा जाता है। ऐसे में एससीओ का सदस्य होते हुए भी भारत चार देशों के संगठन क्वाड का भी सदस्य है।
क्या करता है एससीओ समूह?
एससीओ का मुख्य उद्देश्य संबंधित देशों के बीच सहयोग, अपराध और आतंकवाद से लड़ाई, बाहरी यात्रा और व्यापार को सुविधाजनक बनाना, राष्ट्रीय सुरक्षा में सहयोग, तकनीकी सहयोग और अन्य क्षेत्रों में सहयोग जैसी अनेक विषयों पर सहमति विकसित करना होता है।
विज्ञापन
क्या है एससीओ समिट?
एससीओ समिट एक आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो दक्षिणी एशिया में स्थित देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है। इस संगठन का निर्माण 2001 में शंघाई में हुआ था और इसमें चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, कजाखस्तान, उजबेकिस्तान, तजाकिस्तान और किर्गिजस्तान शामिल हैं। बता दें रूसी और मंदारिन वर्तमान में एससीओ में आधिकारिक और कामकाजी भाषाओं के रूप में उपयोग की जाती हैं। ग्रुप के दस्तावेज भी इन्हीं दो भाषाओं में तैयार किए जाते हैं। रूस और चीन के अलावा चार मध्य एशियाई राज्य एससीओ के संस्थापक सदस्यों में से हैं। बैठक में रूसी व्यापक रूप से बोली और लिखी जाती है।
विज्ञापन
SCO समूह के देशों में भारत का बड़ा महत्व
भारत के लिए एससीओ का महत्व बहुत है। इसमें भारत को दक्षिण एशिया में स्थान देने के साथ-साथ अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने का मौका भी मिलता है। भारत एससीओ संगठन के देशों में एक महत्वपूर्ण देश के रूप में उभरा है। इस संगठन में चीन और रूस प्रमुख देश हैं। इस संगठन को नाटो के विकल्प के तौर पर भी देखा जाता है। ऐसे में एससीओ का सदस्य होते हुए भी भारत चार देशों के संगठन क्वाड का भी सदस्य है।
विज्ञापन
क्या करता है एससीओ समूह?
एससीओ का मुख्य उद्देश्य संबंधित देशों के बीच सहयोग, अपराध और आतंकवाद से लड़ाई, बाहरी यात्रा और व्यापार को सुविधाजनक बनाना, राष्ट्रीय सुरक्षा में सहयोग, तकनीकी सहयोग और अन्य क्षेत्रों में सहयोग जैसी अनेक विषयों पर सहमति विकसित करना होता है।
विज्ञापन
क्या है एससीओ समिट?
एससीओ समिट एक आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो दक्षिणी एशिया में स्थित देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है। इस संगठन का निर्माण 2001 में शंघाई में हुआ था और इसमें चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, कजाखस्तान, उजबेकिस्तान, तजाकिस्तान और किर्गिजस्तान शामिल हैं। बता दें रूसी और मंदारिन वर्तमान में एससीओ में आधिकारिक और कामकाजी भाषाओं के रूप में उपयोग की जाती हैं। ग्रुप के दस्तावेज भी इन्हीं दो भाषाओं में तैयार किए जाते हैं। रूस और चीन के अलावा चार मध्य एशियाई राज्य एससीओ के संस्थापक सदस्यों में से हैं। बैठक में रूसी व्यापक रूप से बोली और लिखी जाती है।