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शाहीन बाग पर आज भी नहीं हुआ फैसला, वार्ताकारों ने सौंपी रिपोर्ट, अब 26 फरवरी को सुनवाई

Mon, 24 Feb 2020 12:46 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Mon, 24 Feb 2020 12:46 PM IST
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Shaheen Bagh three interlocutors submitted their report in Supreme Court next hearing on 26th Feb.
शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी - फोटो : अमर उजाला

शाहीन बाग पर फैसला सोमवार को भी नहीं हो सका। सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा नियुक्त दोनों वार्ताकारों ने अपनी रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में सौंप दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह वार्ताकारों की रिपोर्ट पर गौर करेगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दिया। अब अगली सुनवाई 26 फरवरी को होगी।

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न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसफ की पीठ के सामने अधिवक्ता साधना रामचन्द्रन ने यह रिपोर्ट पेश की। न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े के साथ साधना रामचन्द्रन को शाहीन बाग में धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत के लिये वार्ताकार नियुक्त किया गया है।

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पीठ ने कहा कि वह इस रिपोर्ट का अवलोकन करेगी। न्यायालय इस मामले में अब 26 फरवरी को सुनवाई करेगा। पीठ ने स्पष्ट किया कि वार्ताकारों की यह रिपोर्ट याचिकाकर्ताओं और केंद्र और दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ताओं के साथ इस समय साझा नहीं की जाएगी।
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इससे पहले मामले की सुनवाई शुरू होते ही साधना रामचन्द्रन ने पीठ से कहा कि उन्हें वार्ताकार की जिम्मेदारी प्रदान करने के लिए न्यायालय की कृतज्ञ हैं और वार्ताकारों के लिए यह बहुत कुछ सीखने का अवसर था जो सकारात्मक था। पीठ ने कहा कि इसकी विवेचना करते हैं। हम इस मामले में बुधवार को सुनवाई करेंगे।

केंद्र और दिल्ली पुलिस के साथ साझा नहीं की जाएगी रिपोर्ट
एक याचिकाकर्ता के वकील ने जब यह कहा कि रिपोर्ट उनके साथ भी साझा की जानी चाहिए तो पीठ ने कहा कि हम यहां हैं। सभी लोग यहां हैं। पहले हमें इस रिपोर्ट का लाभ लेने दीजिए। रिपोर्ट की प्रति सिर्फ न्यायालय के लिए ही है।

इससे पहले, पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला ने शीर्ष अदालत से कहा था कि धरना प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और धरना स्थल से दूर सड़क पर पुलिस द्वारा अनावश्यक रूप से  लगाए गए अवरोधों की वजह से लोगों को आने जाने में परेशानी हो रही है।

सामाजिक कार्यकर्ता सैयद बहादुर अब्बास नकवी और भीम आर्मी के मुखिया चन्द्र शेखर आजाद ने भी इस मामले में दाखिल अपने संयुक्त हलफनामे में यह दृष्टिकोण व्यक्त किया है। हबीबुल्ला, आजाद और नकवी ने इस मामले में हस्तक्षेप के लिये संयुक्त रूप से आवेदन दाखिल किया है। शीर्ष अदालत ने पहले कहा था कि लोगों को शांतिपूर्ण और वैध तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार है, लेकिन शाहीन बाग में सार्वजनिक सड़क पर अवरोध उसे परेशान कर रहा है क्योंकि यह अव्यवस्था की स्थिति पैदा कर सकता है।

नकवी और आजाद ने अपने संयुक्त हलफनामे में आरोप लगाया है कि मौजूदा सरकार ने अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर हिंसा और गुंडागर्दी के कृत्यों को गलत तरीके से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर थोपने की रणनीति तैयार की है।

हबीबुल्ला ने अपने हलफनामे में कहा है कि प्रदर्शनकारियों ने उनसे कहा है कि वह न्यायालय को इस बात से अवगत कराएं कि वे नागरिकता संशोधन कानून, राष्टीय जनसंख्या रजिस्टर और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को अपनी भावी पीढ़ी के अस्तित्व के लिये खतरा समझते हुए ही बाध्य होकर यह अपनी असहमति जाहिर कर रहे हैं।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ पिछले साल 15 दिसंबर से चल रहे विरोध प्रदर्शन की वजह से कालिन्दी कुंज-शाहीनबाग का रास्ता और ओखला अंडरपास पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इस मामले में भाजपा के पूर्व विधायक नंद किशोर गर्ग ने भी अलग से शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर शाहीन बाग से इन प्रदर्शनकारियों को हटाने का निर्देश प्राधिकारियों को देने का अनुरोध किया है।


दो मेट्रो स्टेशन बंद
सीएए के विरोध में प्रदर्शन के बाद रविवार को माहौल बिगड़ने के बाद सोमवार सुबह एहतियात के तौर पर मौजपुर और बाबरपुर मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं। यहां कोई ट्रेन नहीं रुक रही है।  गौरतलब है कि शाहीन बाग के अलावा जाफराबाद व सीलमपुर में भी महिलाएं धरने पर बैठीं थीं, लेकिन शनिवार रात जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे महिलाओं ने सड़क जाम कर दी। 


 

दयालपुर में उपद्रवियों ने कार और तीन ऑटो फूंके
दयालपुर इलाके में रविवार देर शाम मामूली कहासुनी पर दो गुट आपस में भिड़ गए। देखते ही देखते दोनों गुटों ने एक-दूसरे पर पथराव शुरू कर दिया। बवाल के दौरान एक कार और तीन ऑटो में आग लगा दी गई। साथ ही, कई दुकानों में भी तोड़फोड़ की गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उपद्रव की सूचना पुलिस को तत्काल दी गई थी। इसके बावजूद काफी कम संख्या में पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे। उपद्रवियों की भारी संख्या के कारण वे एक किनारे खड़े होकर मूकदर्शक बने सब देखते रहे। कुछ देर बाद अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। इसके बाद पुलिस ने उपद्रवियों पर आंसू गैस के गोले छोड़कर उन्हें तितर-बितर किया।

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