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शाहीन बाग : नोएडा से आने की नहीं इजाजत, गुटबाजी से परेशान लोग
Sun, 23 Feb 2020 11:19 PM IST
Mohit Mudgal
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Sun, 23 Feb 2020 11:19 PM IST
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नोएडा से आने की इजाजत नहीं है।
- फोटो : अमर उजाला
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शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों की गुटबाजी से वाहन चालक दो दिन से खासे परेशान हैं। ओखला पक्षी विहार की ओर से कालिंदी कुंज जाने वाले रास्ते को खोलने पर दो दिन से ऊहापोह है। एक गुट दिन में रास्ता खोल देता है तो दूसरा गुट रात होते ही इसे पक्षी विहार गेट से बंद कर देता है। रविवार सुबह से जामिया की ओर से नोएडा जाने वाले वाहनों को इजाजत थी, लेकिन नोएडा व फरीदाबाद से शाहीन बाग के रास्ते पर जाने की नहीं।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि बैरिकेड के पास तैनात सुरक्षाकर्मी उस ओर से आने वाले वाहनों को रोक रहे हैं। उधर, रास्ता खोले जाने को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में होने की वजह से कोई भी पुलिस अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि मामला सुप्रीम कोर्ट के पर्यवेक्षण में है। वहां से आगे का निर्णय होगा। कालिंदी कुंज मार्ग पर चल रहे प्रदर्शनों के चलते यह सड़क दो माह से अधिक समय से बंद है। इससे परेशान लोग कई बार विरोध जताने के लिए प्रदर्शन कर चुके हैं।
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रविवार को सड़क खुलवाने की मांग लेकर सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शाहीन बाग ठोकर संख्या-9 से कालिंदी कुंज जाने वाला मार्ग प्रदर्शनकारियों ने खोला है। इससे जामिया, बटला हाउस और शाहीन बाग इलाके के लोगों को ही फायदा हो रहा है। बाकी के लोगों को इससे कोई सुविधा नहीं है। इस रास्ते पर कालिंदी कुंज की ओर जाने की इजाजत है, लेकिन आने की नहीं। माना जा रहा है कि पुलिस अनहोनी की आशंका को देखते हुए इस रास्ते से जाने की इजाजत नहीं दे रही है।
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शाहीन बाग नहीं पहुंचे वार्ताकार, अब फिर सुप्रीम कोर्ट पर नजर
शाहीन बाग का रास्ता खाली कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त वार्ताकार संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन अंतिम दिन रविवार को प्रदर्शनस्थल नहीं पहुंचे। उन्हें अब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट देनी है। अब सभी पक्षों की नजरें एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पर हैं। वार्ताकारों के आने की उम्मीद में भारी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कोर्ट उनके हक में ही फैसला देगा। उधर, अब तक की वार्ता बेनतीजा रहने के पीछे प्रदर्शनकारियों की गुटबाजी को ही कारण बताया जा रहा है।
शाहीन बाग का रास्ता खाली कराने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए तीन वार्ताकारों को नियुक्त किया था। इनमें से दो संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन ने चार दिन तक प्रदर्शनकारियों को रास्ता खाली करने के लिए मनाया, लेकिन बातचीत हर बार बेनतीजा रही। यहां तक कि एक तरफ का रास्ता खाली करने का प्रस्ताव भी प्रदर्शनकारियों ने कोर्ट व पुलिस से सुरक्षा का लिखित आश्वासन मांगकर टाल दिया। इसके बाद वार्ताकारों ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। उम्मीद है कि सोमवार को सुनवाई के दौरान रास्ता खाली करने को लेकर फैसला आ सकता है।
शाहीन बाग से की जाफराबाद जाने की अपील
शाहीन बाग में प्रदर्शन स्थल पर रविवार सुबह से ही महिलाओं से जाफराबाद में प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जाने की अपील की जा रही थी। मंच से कहा जा रहा था कि जाफराबाद में भारी से भारी संख्या में पहुंचकर वहां के प्रदर्शन को सफल बनाएं। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर भी लोगों से जाफराबाद जाने के लिए कहा जा रहा था।
सुप्रीम सुनवाई से पहले पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा
सुप्रीम कोर्ट में शाहीन बाग के बंद पड़े रास्ते को लेकर सुनवाई से पहले पुलिस भी सतर्क है। प्रदर्शन स्थल के आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। किसी भी हंगामे की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त बल को रिजर्व रखा गया है।