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Libya: 'न पासपोर्ट थे, न टिकट के पैसे', भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप के बाद लीबिया में फंसे 17 देशवासी लौटे
Mon, 21 Aug 2023 01:57 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Mon, 21 Aug 2023 01:57 PM IST
सार
भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के उच्च स्तरीय हस्तक्षेप के बाद लीबिया के अधिकारी भारतीयों को छोड़ने के लिए राजी हो गए।
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लीबिया में फंसे भारतीय वापस लौटे
- फोटो : ANI
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विस्तार
लीबिया में सशस्त्र समूह द्वारा बंदी बनाए गए 17 भारतीय नागरिकों को विदेश मंत्रालय (एमईए) के निरंतर प्रयासों के बाद भारत वापस लाया गया है। पंजाब और हरियाणा के रहने वाले भारतीय नागरिक रविवार को दिल्ली पहुंचें।
इन भारतीयों को वापस भारत पहुंचाने में ट्यूनिशिया स्थित भारतीय दूतावास ने अहम भूमिका निभाई है। यह मामला ट्यूनिस में भारतीय दूतावास के पास तब आया, जब 26 मई को लीबिया में फंसे भारतीय नागरिकों के परिवारवालों ने बात की।
लोगो ने बताया कि भारतीयों को देश में तस्करी कर लाया गया था और उन्हें ज्वारा शहर में एक सशस्त्र समूह द्वारा बंदी बनाया गया था। भारतीय दूतावास लोगों को वापस लाने के लिए लगातार लीबिया के अधिकारियों के संपर्क में थे।
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लीबिया के अधिकारियों ने 13 जून को भारतीयों सुरक्षापूर्वक बाहर निकालने में कामयाब रहे, लेकिन उन्हें अपनी कस्टडी में ही रखा था। हालांकि, बाद में भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के उच्च स्तरीय हस्तक्षेप के बाद लीबिया के अधिकारी भारतीयों को छोड़ने के लिए राजी हो गए।
लीबिया में रहने के दौरान भारतीय दूतावास ने वहां फंसे लोगों की जरूरतों का ध्यान रखते हुए उनके लिए खेने-पीने की समानो, दवाई और कपड़ों का इंतेजाम भी किया। उनके पास पासपोर्ट न होने के कारण दूतावास ने आपातकालीन प्रमाणपत्र बनाकर उन्हें भारत पहुंचाने में मदद की। भारतीय दूतावास ने उनके टिकट का भी खर्च उठाया।
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इन भारतीयों को वापस भारत पहुंचाने में ट्यूनिशिया स्थित भारतीय दूतावास ने अहम भूमिका निभाई है। यह मामला ट्यूनिस में भारतीय दूतावास के पास तब आया, जब 26 मई को लीबिया में फंसे भारतीय नागरिकों के परिवारवालों ने बात की।
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लोगो ने बताया कि भारतीयों को देश में तस्करी कर लाया गया था और उन्हें ज्वारा शहर में एक सशस्त्र समूह द्वारा बंदी बनाया गया था। भारतीय दूतावास लोगों को वापस लाने के लिए लगातार लीबिया के अधिकारियों के संपर्क में थे।
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लीबिया के अधिकारियों ने 13 जून को भारतीयों सुरक्षापूर्वक बाहर निकालने में कामयाब रहे, लेकिन उन्हें अपनी कस्टडी में ही रखा था। हालांकि, बाद में भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के उच्च स्तरीय हस्तक्षेप के बाद लीबिया के अधिकारी भारतीयों को छोड़ने के लिए राजी हो गए।
लीबिया में रहने के दौरान भारतीय दूतावास ने वहां फंसे लोगों की जरूरतों का ध्यान रखते हुए उनके लिए खेने-पीने की समानो, दवाई और कपड़ों का इंतेजाम भी किया। उनके पास पासपोर्ट न होने के कारण दूतावास ने आपातकालीन प्रमाणपत्र बनाकर उन्हें भारत पहुंचाने में मदद की। भारतीय दूतावास ने उनके टिकट का भी खर्च उठाया।