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COP 30: कॉप30 के विशेष दूतों ने की वैश्विक नेताओं से जलवायु संकट पर एकजुट होने की अपील, जारी की यह चेतावनी

Fri, 07 Nov 2025 07:14 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Fri, 07 Nov 2025 07:14 PM IST
सार

कॉप30 के सात विशेष दूतों ने दुनिया के नेताओं से मांग की है कि वे इस साल ब्राजील में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में एकजुटता दिखाएं और पेरिस समझौते को लागू करने में ठोस प्रगति करें।

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Seven special envoys to COP30 urge world leaders to send strong signal of unity against climate crisis
COP 30 - फोटो : unesco

विस्तार

कॉप30 के सात विशेष दूतों ने इस साल ब्राजील में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में शामिल होने वाले वैश्विक नेताओं से पेरिस समझौते के क्रियान्वयन में निर्णायक प्रगति लाने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि एक डिग्री सेल्सियस के दसवें हिस्से के बराबर अतिरिक्त तापमान भी ‘कठोर परिणाम’ लाएगा। दूतों ने कहा कि यह सम्मेलन एक बड़ी संभावना और एक कठिन चुनौती दोनों है। इसे दुनिया को यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय जलवायु संकट का मुकाबला करने के लिए साथ खड़ा है।

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कॉप30 के अध्यक्ष और विश्व नेताओं को लिखे एक संयुक्त पत्र में, दूतों ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन एक ‘‘महत्वपूर्ण अवसर और एक गंभीर चुनौती’’ दोनों प्रस्तुत करता है और इससे एक मजबूत संकेत मिलना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय जलवायु संकट का सामना करने के अपने दृढ़ संकल्प में एकजुट है। आगामी 10 नवंबर से 21 नवंबर तक आयोजित होने वाला कॉप30 सम्मेलन पेरिस समझौते के एक दशक पूरे होने के अवसर पर हो रहा है। यह वार्षिक जलवायु शिखर सम्मेलन बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों, चल रहे युद्धों और अमेरिकी शुल्क से उत्पन्न आर्थिक अनिश्चितता के बीच हो रहा है।
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2030 तक दुनिया में तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की बहुत संभावना?
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने गुरुवार को कहा कि 2025 रिकॉर्ड पर दूसरा या तीसरा सबसे गर्म वर्ष होगा। वर्ष 2024 सबसे गर्म वर्ष था और ऐसा पहला वर्ष था जब वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक था। हालांकि, पेरिस समझौते में निर्दिष्ट 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा का स्थायी उल्लंघन 20 या 30 वर्षों की अवधि में दीर्घकालिक तापमान वृद्धि को दर्शाता है।
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वैज्ञानिकों ने कहा कि 2030 के दशक की शुरुआत तक दुनिया में तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की बहुत संभावना है।दक्षिण एशिया, अफ्रीका, यूरोप और उत्तरी अमेरिका सहित प्रमुख क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले दूतों ने कहा कि 2015 के पेरिस समझौते के बाद से हुई प्रगति के बावजूद, तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए वैश्विक कार्रवाई अपर्याप्त है।

उन्होंने लिखा, हम पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ रहे हैं। दूतों ने कहा कि कॉप30 को पेरिस समझौते और दुबई में कॉप28 में अपनाई गई संयुक्त अरब अमीरात की आम सहमति, दोनों के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।


कॉप30 के सात विशेष अदनान जेड अमीन (मध्य पूर्व), अरुणाभ घोष (दक्षिण एशिया), कार्लोस लोपेस (अफ्रीका), जैसिंडा अर्डर्न (ओशिनिया), जोनाथन पर्शिंग (उत्तरी अमेरिका), लॉरेंस टुबियाना (यूरोप), और पेट्रीसिया एस्पिनोसा (लैटिन अमेरिका और कैरिबियन)दूत हैं।


 

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