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Hindi News ›   India News ›   Sessions court said Magistrate had hypertechnical view in calling Physical accused producer’s arrest illegal

Mumbai: 'मजिस्ट्रेट को अति-तकनीकी दृष्टिकोण नहीं...', दुष्कर्म के आरोपी फिल्म निर्माता को राहत पर कोर्ट नाराज

Fri, 27 Dec 2024 01:45 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 27 Dec 2024 01:45 PM IST
सार

गुणवंत जैन को 21 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था और अगले दिन मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी के चार मिनट बाद आरोपी को बताया गया था कि उसे क्यों गिरफ्तार किया जा रहा। 

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Sessions court said Magistrate had hypertechnical view in calling Physical accused producer’s arrest illegal
कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

एक सत्र अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट को आरोपी फिल्म निर्माता गुणवंत जैन की गिरफ्तारी के कारणों के बारे में सूचना मिलने के समय को लेकर अति-तकनीकी दृष्टिकोण नहीं अपनाना चाहिए था, जिस कारण उसे राहत दी गई थी। जैन पर एक 38 वर्षीय मॉडल के साथ दुष्कर्म का आरोप है।

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इसलिए किया था रिहा
गुणवंत जैन को 21 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था और अगले दिन उसे उपनगर अंधेरी स्थित मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया, जहां पुलिस ने पांच दिन की रिमांड की मांग की थी। हालांकि, मजिस्ट्रेट ने पाया कि गिरफ्तारी के चार मिनट बाद आरोपी को बताया गया था कि उसे क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है, जो कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) का उल्लंघन है। इसलिए जैन को तुरंत रिहा कर दिया। 
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पुलिस पहुंची थी सत्र न्यायालय
इस आदेश के खिलाफ पुलिस ने सत्र न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की। 24 दिसंबर को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डीजी धोबले ने पुलिस की याचिका को स्वीकार करते हुए फिल्म निर्माता को संबंधित पुलिस स्टेशन (वर्सोवा) में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। साथ ही, अदालत ने कहा कि अगर जैन आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो पुलिस उसे फिर से गिरफ्तार कर सकती है।
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जैन के वकील का दावा
पुलिस ने सत्र न्यायालय में कहा कि मजिस्ट्रेट का आदेश कानून के खिलाफ और जांच में रुकावट डालने वाला था। पुलिस का कहना था कि जैन की गिरफ्तारी बीएनएसएस के प्रावधानों के तहत वैध थी। वहीं, जैन के वकील ने यह तर्क दिया कि गिरफ्तारी खुद अवैध थी क्योंकि बीएनएसएस के तहत अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। उनका कहना था कि जैन या उनके परिवार वालों  को गिरफ्तारी के कारणों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी गई थी। उन्हें 21 नवंबर को रात 11 बजकर 56 मिनट पर गिरफ्तार किया था और 23 बजे गिरफ्तारी का कारण बताया गया था। 

क्या बोला सत्र न्यायालय?
सत्र न्यायालय ने कहा कि यह विवाद नहीं था कि गिरफ्तारी के कारणों के बारे में जैन को सूचित किया गया था, बल्कि यह सवाल था कि समय पर सूचना दी गई थी या नहीं। कोर्ट ने कहा, 'कानून के तहत गिरफ्तारी के कारण तुरंत सूचित किए जाने की बात कही गई है, लेकिन इसका मतलब है कि इसे उचित समय के भीतर किया जाना चाहिए।'

कोर्ट ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के कारणों के दस्तावेज में समय 23:00 बजे के आसपास दर्ज किया गया था, लेकिन यह केवल एक टाइपिंग गलती हो सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस गलत समय से कोई नुकसान नहीं हुआ और न ही इसका कोई प्रबंधकीय असर पड़ा। 

अंततः सत्र न्यायालय ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने 'तत्काल' शब्द का गलत अर्थ लिया और इसकी वजह से आदेश को निरस्त किया। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि मजिस्ट्रेट कोर्ट को अति-तकनीकी दृष्टिकोण नहीं अपनाना चाहिए था और इसे जांच की जरूरतों के साथ प्रक्रिया का संतुलन बनाना चाहिए था।


प्राथमिकी में फिल्म निर्माता पर आरोप है कि उसने मॉडल को शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया, उसे नशीला पदार्थ देकर शारीरिक उत्पीड़न किया और धमकी दी। 

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