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वरिष्ठ अधिकारी और बाबू नहीं दिखा सकेंगे 'ऐंठ', जनता से इस लहजे में होगी बातचीत

Sat, 31 Oct 2020 06:44 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 31 Oct 2020 06:44 PM IST
सार

विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों द्वारा तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि सिविल सेवा के अधिकारियों का जनता के प्रति जो रवैया होता है, उसमें सौहार्द एवं समन्वय की कमी होती है...

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Senior officials and clerks will not be arrogant with public, dopt will provide the training to deal with public
Dr Jitendra Singh, Minister DOPT - फोटो : PIB

विस्तार

आईएएस और आईपीएस सहित दूसरी सेवाओं के अधिकारी व बाबुओं का रवैया अब बदल जाएगा। केंद्र सरकार देश के सभी अधिकारियों को एक सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण देगी। इसमें अधिकारियों को सिखाया जाएगा कि जनसेवा में रहते हुए वे किस तरह से आचार विचार करें। लोगों के साथ बातचीत में और उनकी समस्याओं का निदान करने में नैतिकता का भी ध्यान रखा जाए। सभी अधिकारियों को ट्रेनिंग के दौरान यह हिदायत दी जाएगी कि वे जनता के बीच में एक लोकसेवक बन कर काम करें और 'टोरा' दिखाने से बचें।

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कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के मुताबिक, विजिलेंस को मिलने वाली शिकायतें और विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों द्वारा तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि सिविल सेवा के अधिकारियों का जनता के प्रति जो रवैया होता है, उसमें सौहार्द एवं समन्वय की कमी होती है। कहीं न कहीं लालफीताशाही की अवधारणा भी देखी गई है।
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चूंकि इन अधिकारियों के हाथ में सत्ता की कई शक्तियां होती हैं, इसलिए इनके पास आम जनता की आवाजाही लगी रहती है। मूलभूत सुविधाओं के अलावा अन्य सरकारी कामकाज के लिए अधिकांश लोग इन्हीं अफसरों से संपर्क करते हैं। अनेक राज्य ऐसे हैं, जहां पर इन अधिकारियों का रवैया जनता के प्रति सहयोग एवं नैतिकता वाला नहीं होता।
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कई जगह पर अधिकारी अपने कार्यालय में मिलने वालों के लिए भी एक प्रोटोकॉल लागू कर देते हैं। इससे जनता को भारी परेशानी होती है। देखने में आया है कि कार्यालय के बाबू भी कम नहीं हैं। वे भी जनता से सीधे मुंह बातचीत नहीं करते। अधिकारी के आने-जाने का समय तक नहीं बताते हैं। लोगों को शिकायत रहती है कि वे बिना वजह से उनके चक्कर कटाते रहते हैं।

इन्हीं सब दिक्कतों के मद्देनजर, केंद्र सरकार ने सभी आईएएस, आईपीएस, भारतीय वन सेवा के अधिकारी, सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत भारत सरकार में काम कर रहे अफसर, केंद्रीय सचिवालय सेवा, केंद्रीय सचिवालय स्टेनोग्राफर सर्विस और विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के अधिकारियों को ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया है।


इतना ही नहीं, इस प्रक्रिया में राज्यों एवं संघ क्षेत्रों के अधिकारी भी शामिल हैं। इन सभी के लिए पंचगनी के आईसी सेंटर फॉर गवर्नेंस में एक सप्ताह का 'इन सर्विस ट्रेनिंग प्रोग्राम' शुरू किया जा रहा है। सेवा में रहते हुए वे किस तरह से आचारसंहिता का पालन करें, ट्रेनिंग का यह मुख्य विषय रहेगा। पहला ट्रेनिंग सत्र 30 नवंबर से 4 दिसंबर तक आयोजित होना था, लेकिन अब उसे आगे बढ़ा दिया गया है। अब वह सत्र फरवरी में आयोजित होगा।

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