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Semicon: दुनिया की ताकत बनना है तो चीन भरोसे नहीं रह सकता भारत, सेमीकंडक्टर निर्माण में खुलेंगे अपार अवसर
सार
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से पूरी दुनिया में सेमीकंडक्टर आधारित उपकरणों, मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर, लैपटॉप, घरेलू उपयोग की सामग्रियों, वाहनों, खिलौनों और आयुध सामग्रियों का विकास हो रहा है, इसकी गति लगातार बढ़ते रहने का अनुमान है।
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सेमीकंडक्टर क्षेत्र में क्रांति की ओर भारत।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिका की सेमीकंडक्टर निर्माण-बिक्री से जुड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि संगठन द सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री एसोसिएशन (SIA) ने बताया है कि जुलाई 2024 में ही ग्लोबल सेमीकंडक्टर का बिक्री बाजार 51.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा जो पिछले वर्ष के जुलाई महीने की तुलना में 18.7 प्रतिशत अधिक है। यदि केवल अमेरिका के सेमीकंडक्टर बाजार की बात करें तो गत वर्ष की तुलना में यह 40 प्रतिशत से अधिक है। केवल सिया के आंकड़ों से ही समझा जा सकता है कि सेमीकंडक्टर का व्यवसाय पूरी दुनिया में किस तेज गति से आगे बढ़ रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से पूरी दुनिया में सेमीकंडक्टर आधारित उपकरणों, मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर, लैपटॉप, घरेलू उपयोग की सामग्रियों, वाहनों, खिलौनों और आयुध सामग्रियों का विकास हो रहा है, इसकी गति लगातार बढ़ते रहने का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैश्विक आर्थिक ताकत बनने का इच्छुक भारत अपनी सेमीकंडक्टर की आवश्यकताओं के लिए चीन-अमेरिका या सिंगापुर-ताइवान पर निर्भर नहीं रह सकता।
वैश्विक बाजार
वर्ष 2023 में सेमीकंडक्टर निर्माण का वैश्विक व्यवसाय 611.35 बिलियन डॉलर के करीब था जो इसके पूर्व वर्ष से लगभग 8.2 प्रतिशत अधिक था। वर्तमान वर्ष के वैश्विक कारोबार में पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी होने का अनुमान है। केवल अगले पांच साल में यह व्यापार एक हजार करोड़ डॉलर का हो सकता है।
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भारत का बढ़ता आयात बिल
पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने संसद में दिए अपने एक बयान में बताया था कि 2020-21 में भारत का सेमीकंडक्टर आयात बिल 67497 करोड़ रुपये का था जो 2022-23 में बढ़कर 129,703 करोड़ रुपये हो गया। भारत के आयात का सबसे बड़ा हिस्सा इस समय कच्चे तेल के आयात का है। कहा जा सकता है कि यदि भारत ने समय रहते ध्या्न नहीं दिया तो आने वाले समय में सेमीकंडक्टर का आयात भारत के सबसे बड़े आयात बिल लिस्ट में शामिल हो जाता।
चीन को देखकर सेमीकंडक्टर पॉवर बनना जरूरी
चूंकि, भारत और चीन की तनातनी जगजाहिर है, आर्थिक-सामरिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी इस मूल आवश्यकता के लिए चीन जैसे देश पर निर्भर नहीं रह सकता। भारत सेमीकंडक्टर के लिए चीन पर अपेक्षाकृत कम निर्भर है। लेकिन इसके बाद भी भारत के कुल सेमीकंडक्टर आयात में उसकी बड़ी हिस्सेदारी है। 2020-21 में उसका भारत को सेमीकंडक्टर निर्यात 24,604 करोड़ रुपये था जो 2022-23 में 37,681 करोड़ रुपये हो गया।
भारत सहित पूरी दुनिया के देश सौर ऊर्जा को अपना मूल ऊर्जा स्रोत बनाने के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। इस सेक्टर में भी सेमीकंडक्टर की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण हो चुकी है। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत चीन के सहारे छोड़ दे, यह उसके सामरिक हित में भी नहीं है। यही कारण है कि सेमीकंडक्टर निर्माण की दुनिया की बड़ी ताकत बनना भारत के लिए अपरिहार्य है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज का कदम भारत के भविष्य की दृष्टि से ऐतिहासिक कहा जा सकता है।
पीएम ने क्या कहा?
ग्रेटर नोएडा में सेमीकंडक्टर निर्माण को समर्पित Semicon 2024 का उद्घाटन करते हुए देश को सेमीकंडक्टर की ताकत बनाने की बात की। उन्होंने देश में सेमीकंडक्टर चिप तकनीकी के 85 हजार तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करने की बात भी कही। उद्योगों को निवेश के लिए आमंत्रित कर उन्होंने इस सेक्टर में रोजगार के भारी अवसर पैदा करने की बात भी कही। भारत आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर बाजार में 500 बिलियन डॉलर की ताकत बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इससे देश को काफी लाभ होगा।
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बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से पूरी दुनिया में सेमीकंडक्टर आधारित उपकरणों, मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर, लैपटॉप, घरेलू उपयोग की सामग्रियों, वाहनों, खिलौनों और आयुध सामग्रियों का विकास हो रहा है, इसकी गति लगातार बढ़ते रहने का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैश्विक आर्थिक ताकत बनने का इच्छुक भारत अपनी सेमीकंडक्टर की आवश्यकताओं के लिए चीन-अमेरिका या सिंगापुर-ताइवान पर निर्भर नहीं रह सकता।
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वैश्विक बाजार
वर्ष 2023 में सेमीकंडक्टर निर्माण का वैश्विक व्यवसाय 611.35 बिलियन डॉलर के करीब था जो इसके पूर्व वर्ष से लगभग 8.2 प्रतिशत अधिक था। वर्तमान वर्ष के वैश्विक कारोबार में पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी होने का अनुमान है। केवल अगले पांच साल में यह व्यापार एक हजार करोड़ डॉलर का हो सकता है।
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भारत का बढ़ता आयात बिल
पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने संसद में दिए अपने एक बयान में बताया था कि 2020-21 में भारत का सेमीकंडक्टर आयात बिल 67497 करोड़ रुपये का था जो 2022-23 में बढ़कर 129,703 करोड़ रुपये हो गया। भारत के आयात का सबसे बड़ा हिस्सा इस समय कच्चे तेल के आयात का है। कहा जा सकता है कि यदि भारत ने समय रहते ध्या्न नहीं दिया तो आने वाले समय में सेमीकंडक्टर का आयात भारत के सबसे बड़े आयात बिल लिस्ट में शामिल हो जाता।
चीन को देखकर सेमीकंडक्टर पॉवर बनना जरूरी
चूंकि, भारत और चीन की तनातनी जगजाहिर है, आर्थिक-सामरिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी इस मूल आवश्यकता के लिए चीन जैसे देश पर निर्भर नहीं रह सकता। भारत सेमीकंडक्टर के लिए चीन पर अपेक्षाकृत कम निर्भर है। लेकिन इसके बाद भी भारत के कुल सेमीकंडक्टर आयात में उसकी बड़ी हिस्सेदारी है। 2020-21 में उसका भारत को सेमीकंडक्टर निर्यात 24,604 करोड़ रुपये था जो 2022-23 में 37,681 करोड़ रुपये हो गया।
भारत सहित पूरी दुनिया के देश सौर ऊर्जा को अपना मूल ऊर्जा स्रोत बनाने के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। इस सेक्टर में भी सेमीकंडक्टर की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण हो चुकी है। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत चीन के सहारे छोड़ दे, यह उसके सामरिक हित में भी नहीं है। यही कारण है कि सेमीकंडक्टर निर्माण की दुनिया की बड़ी ताकत बनना भारत के लिए अपरिहार्य है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज का कदम भारत के भविष्य की दृष्टि से ऐतिहासिक कहा जा सकता है।
पीएम ने क्या कहा?
ग्रेटर नोएडा में सेमीकंडक्टर निर्माण को समर्पित Semicon 2024 का उद्घाटन करते हुए देश को सेमीकंडक्टर की ताकत बनाने की बात की। उन्होंने देश में सेमीकंडक्टर चिप तकनीकी के 85 हजार तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करने की बात भी कही। उद्योगों को निवेश के लिए आमंत्रित कर उन्होंने इस सेक्टर में रोजगार के भारी अवसर पैदा करने की बात भी कही। भारत आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर बाजार में 500 बिलियन डॉलर की ताकत बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इससे देश को काफी लाभ होगा।