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तैयारी नहीं पूरी, यूआईडीएआई से मांगा समय, चेहरा दिखाकर सिम लेना फिलहाल नहीं होगा नसीब
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
Updated Sat, 15 Sep 2018 03:38 AM IST
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चेहरा दिखाकर सिमकार्ड लेने के लिए मोबाइल उपभोक्ताओं को थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। विशिष्ट पहचान पत्र प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के निर्देश के बावजूद दूरसंचार कंपनियां 15 सितंबर से शुरुआत करने की तैयारी नहीं कर सकीं। कंपनियों ने अब कमर कसने के लिए यूआईडीएआई से दो माह वक्त मांगा है। इसके चलते उपभोक्ताओं को निर्धारित अवधि की बजाय यह सुविधा मिलने में देरी होगी।
सरकार ने फर्जी मोबाइल सिम पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए पहले आधार के जरिए पहचान प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद आधार के दुरुपयोग से बचाव के मद्देनजर यूआईडीएआई ने चेहरे की पहचान प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी। इसमें चेहरा दिखाकर सत्यापन की प्रक्रिया निभायी जाएगी। इसका फायदा उन बुजुर्गों, अक्षम लोगों और मजदूर वर्ग के लोगों को भी मिलेगा जिनके फिंगर प्रिंट मिट गए हैं और उनका सत्यापन नहीं हो पा रहा है। प्राधिकरण द्वारा यह सुविधा शुरू करने के लिए तय की गई निर्धारित 15 सितंबर की तारीख के करीब जब इस पर छानबीन की गई तो पता चला कि दूरसंचार कंपनियां तैयार ही नहीं हैं।
एक दूरसंचार कंपनी के अधिकारी ने बताया कि यह एक तकनीकी व्यवस्था है। इसे जल्दबाजी में लागू करना परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए तैयारी पूरा होना जरूरी है जिसके लिए कंपनियों ने यूआईडीएआई से दो माह का वक्त मांगा है। प्राधिकरण ने हरेक दूरसंचार कंपनी को कम से कम 10 फीसद उपभोक्ताओं का सत्यापन चेहरे की पहचान यानी फेस रिकग्नाइजेशन तकनीक के जरिए करना तय करने का निर्देश दिया है।
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इसे सौ फीसद स्तर पर कई चरणों में लागू किया जाएगा। साथ ही अगर कोई भी दूरसंचार कंपनी इस नियम का पालन नहीं करेगा तो उसके उपर 20 पैसे प्रति सब्सक्राइबर जुर्माना लगाया जाएगा। याद रहे कि यह फैसला कई लोगों के बायोमैट्रिक्स नहीं चलने के बाद लिया गया था। इस नियम से अब वही लोग सिम खरीदेंगे जिन्हें वास्तव में सिम की जरुरत होगी।
दूरसंचार कंपनियों के सूत्रों के मुताबिक अभी कैमरा निर्माता कंपनियों को गुणवत्ता प्रमाणपत्र नहीं मिला है और अन्य विभिन्न तरह के डिवाइस की जांच भी नहीं हो सकी है। कंपनियों ने समय बढ़ाने की मांग में यूआईडीएआई से जुर्माना नहीं लगाए जाने की मांग की है। माना जा रहा है कि अभी यूआईडीएआई ने इस तिथि को नहीं बढ़ाने का फैसला लिया है। ऐसे में वह कंपनियों पर जुर्माना लगा सकता है। गौरतलब है कि चेहरा दिखाकर सत्पान कराने में सेवा प्रदाता को ग्राहकों की विभिन्न एंगल से फोटो लेनी होगी। साथ ही आंखों के स्थिर रहना तय किया गया है।
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सरकार ने फर्जी मोबाइल सिम पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए पहले आधार के जरिए पहचान प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद आधार के दुरुपयोग से बचाव के मद्देनजर यूआईडीएआई ने चेहरे की पहचान प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी। इसमें चेहरा दिखाकर सत्यापन की प्रक्रिया निभायी जाएगी। इसका फायदा उन बुजुर्गों, अक्षम लोगों और मजदूर वर्ग के लोगों को भी मिलेगा जिनके फिंगर प्रिंट मिट गए हैं और उनका सत्यापन नहीं हो पा रहा है। प्राधिकरण द्वारा यह सुविधा शुरू करने के लिए तय की गई निर्धारित 15 सितंबर की तारीख के करीब जब इस पर छानबीन की गई तो पता चला कि दूरसंचार कंपनियां तैयार ही नहीं हैं।
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एक दूरसंचार कंपनी के अधिकारी ने बताया कि यह एक तकनीकी व्यवस्था है। इसे जल्दबाजी में लागू करना परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए तैयारी पूरा होना जरूरी है जिसके लिए कंपनियों ने यूआईडीएआई से दो माह का वक्त मांगा है। प्राधिकरण ने हरेक दूरसंचार कंपनी को कम से कम 10 फीसद उपभोक्ताओं का सत्यापन चेहरे की पहचान यानी फेस रिकग्नाइजेशन तकनीक के जरिए करना तय करने का निर्देश दिया है।
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इसे सौ फीसद स्तर पर कई चरणों में लागू किया जाएगा। साथ ही अगर कोई भी दूरसंचार कंपनी इस नियम का पालन नहीं करेगा तो उसके उपर 20 पैसे प्रति सब्सक्राइबर जुर्माना लगाया जाएगा। याद रहे कि यह फैसला कई लोगों के बायोमैट्रिक्स नहीं चलने के बाद लिया गया था। इस नियम से अब वही लोग सिम खरीदेंगे जिन्हें वास्तव में सिम की जरुरत होगी।
दूरसंचार कंपनियों के सूत्रों के मुताबिक अभी कैमरा निर्माता कंपनियों को गुणवत्ता प्रमाणपत्र नहीं मिला है और अन्य विभिन्न तरह के डिवाइस की जांच भी नहीं हो सकी है। कंपनियों ने समय बढ़ाने की मांग में यूआईडीएआई से जुर्माना नहीं लगाए जाने की मांग की है। माना जा रहा है कि अभी यूआईडीएआई ने इस तिथि को नहीं बढ़ाने का फैसला लिया है। ऐसे में वह कंपनियों पर जुर्माना लगा सकता है। गौरतलब है कि चेहरा दिखाकर सत्पान कराने में सेवा प्रदाता को ग्राहकों की विभिन्न एंगल से फोटो लेनी होगी। साथ ही आंखों के स्थिर रहना तय किया गया है।