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दावा: मौसम पूर्वानुमानों में 40 प्रतिशत तक सुधार, 48 घंटों के अंदर भूस्खलन के पूर्वानुमान में 65% तक सटीकता
Tue, 24 Jun 2025 07:07 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Tue, 24 Jun 2025 07:07 AM IST
सार
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के सचिव डॉ एम. रविचंद्रन ने कहा, मानसून के पूर्वानुमान में भी बड़ा बदलाव देखा गया है। राष्ट्रीय मानसून मिशन के तहत सांख्यिकीय से भौतिकी-आधारित मॉडल की ओर बढ़ते हुए मौसमी भविष्यवाणियों की सटीकता और स्थानिक संकल्प में काफी वृद्धि हुई है।
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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के सचिव डॉ एम. रविचंद्रन
- फोटो : X@moesgoi
विस्तार
देश में चक्रवात चेतावनी प्रणाली काफी हद तक सटीक हो गई है। 48 घंटों के अंदर भूस्खलन के पूर्वानुमान में 65 प्रतिशत और भारी बारिश, कोहरा और लू जैसी अन्य गंभीर मौसम की घटनाओं के पूर्वानुमान में 40 प्रतिशत सुधार हुआ है। मोदी सरकार के 11 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में सोमवार को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के सचिव डॉ एम. रविचंद्रन ने ये बातें कही।
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उन्होंने कहा, मानसून के पूर्वानुमान में भी बड़ा बदलाव देखा गया है। राष्ट्रीय मानसून मिशन के तहत सांख्यिकीय से भौतिकी-आधारित मॉडल की ओर बढ़ते हुए मौसमी भविष्यवाणियों की सटीकता और स्थानिक संकल्प में काफी वृद्धि हुई है। डॉ. रविचंद्रन ने 2014 से 2025 तक मंत्रालय की प्रमुख उपलब्धियों को बताया और कहा, ये सुधार पिछले एक दशक में अनुसंधान के बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी में निरंतर निवेश का परिणाम हैं। सितंबर 2024 में सरकार ने भारत को मौसम के लिए तैयार और जलवायु के प्रति स्मार्ट बनाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी पहल 'मिशन मौसम' भी शुरू की।
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उन्होंने कहा, भारत के पहले अर्थ सिस्टम मॉडल (आईआईटीएम-ईएसएम) ने अंतरराष्ट्रीय जलवायु विज्ञान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसने जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल की छठी आकलन रिपोर्ट (आईपीसीसी एआर6) और युग्मित मॉडल अंतर-तुलना परियोजना चरण 6 (सीएमआईपी6) में योगदान दिया है। महासागर विज्ञान में डीप ओशन मिशन ने मत्स्य-6000 के सफल गीले बंदरगाह परीक्षणों के साथ एक महत्वपूर्ण मोड़ को चिह्नित किया, जो भारत की मानवयुक्त पनडुब्बी है, जो समुद्र तल से 6,000 मीटर नीचे तक पहुँचने में सक्षम है। डॉ. रविचंद्रन ने कहा कि इससे गहरे समुद्र में अन्वेषण और समुद्री संसाधनों के सतत निष्कर्षण का मार्ग प्रशस्त होगा।
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हिंद महासागर में दो सक्रिय और दो निष्क्रिय हाइड्रोथर्मल वेंट भी खोजे
डॉ. रविचंद्रन ने कहा, हमने हिंद महासागर में दो सक्रिय और दो निष्क्रिय हाइड्रोथर्मल वेंट भी खोजे हैं। जैव विविधता सर्वेक्षणों में 23 नई प्रजातियों की पहचान की है, जिससे महासागर विज्ञान में भारत की स्थिति मजबूत हुई है। मंत्रालय ने भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) से अनुमानित 9.2 लाख टीडब्ल्यूएच वार्षिक अक्षय ऊर्जा क्षमता का आकलन करने के लिए एक एकीकृत महासागर ऊर्जा एटलस भी जारी किया, जिसमें लहर, ज्वार, पवन और महासागर तापीय ऊर्जा शामिल है। मछली पकड़ने और समुद्री समुदाय के लिए सेवाओं में काफी विस्तार हुआ है। अब सात लाख से अधिक मछुआरों को संभावित मछली पकड़ने वाले क्षेत्र (पीएफजेड) की सलाह मिल रही है, जो 2014 में एक लाख थी। अधिकारी ने कहा, तेल रिसाव की चेतावनी, कोरल ब्लीचिंग पूर्वानुमान और हानिकारक शैवाल खिलने की चेतावनी जैसी समुद्री सेवाएं अब भारत और छह अन्य हिंद महासागर देशों में 9.45 लाख हितधारकों तक पहुंचती हैं।