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खतरा: कोरोना की नई लहर को लेकर बढ़ने लगीं आशंकाएं, वैज्ञानिकों ने कहा- अस्पतालों में भर्ती रोगियों की संख्या पर देना होगा ध्यान
Tue, 19 Apr 2022 05:51 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 19 Apr 2022 05:51 PM IST
सार
वैज्ञानिकों का कहना है कि कोविड-19 प्रतिबंधों हटने के बाद सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां बढ़ गई हैं जिसके कारण मामले भी बढ़ने लगे हैं। अस्पताल में भर्ती होने वालों पर करीबी नजर रखने की जरूरत है।
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- फोटो : शुभम बंसल
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विस्तार
दिल्ली और उसके आसपास के शहरों में कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं। कई वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे हालात में ध्यान इस बात पर दिया जाना चाहिए कि अस्पताल में कितने लोग भर्ती हो रहे हैं। यह देश में चौथी लहर का संकेत नहीं है। इन्होंने कहा कि कोविड-19 प्रतिबंधों को हटाना, स्कूलों को फिर से खोलना, आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि जैसे कारण राष्ट्रीय राजधानी और इसके आसपास के क्षेत्रों कोरोना मामले को बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
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सामाजिक गतिविधियां बढ़ीं, हट गए प्रतिबंध
कोविड-19 प्रतिबंधों को हटाए हुए दो सप्ताह से अधिक समय हो गया है। यह छुट्टी का समय है और लोग आपस में मिल-जुल रहे हैं। सामाजिक और आर्थिक गतिविधि महामारी से पहले के मुकाबले ज्यादा हो रही हैं। चिकित्सक-महामारी विज्ञानी चंद्रकांत लहरिया ने सावधानी बरतने और निरंतर निगरानी पर जोर देने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि केवल गिनती के मामलों का कोई मतलब नहीं है। हालांकि दिल्ली में मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन अस्पताल में भर्ती लोगों की संख्या में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।
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महामारी विज्ञान और वैज्ञानिक साक्ष्यों को देखते हुए दिल्ली में मामलों में मौजूदा वृद्धि चौथी लहर की शुरुआत नहीं है। उन्होंने कहा कि सार्स कोव-2 (SARS CoV-2) लंबे समय तक हमारे साथ रहने वाला है और इसलिए ऐसा कभी नहीं होता जब नए मामले शून्य होंगे। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 501 ताजा मामलों के साथ दिल्ली की कोविड-19 संक्रमण दर सोमवार को बढ़कर 7.72 प्रतिशत हो गई। पिछली बार शहर में संक्रमण दर सात प्रतिशत से ऊपर थी, 29 जनवरी में 7.4 प्रतिशत और 28 जनवरी में 8.6 प्रतिशत।
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देश में बढ़ने लगी है संक्रमण दर
यह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मंगलवार को दर्ज की गई भारत की समग्र संक्रमण दर 0.31 प्रतिशत के ठीक उलट है और 1,247 कोरोना वायरस मामले दर्ज हुए हैं। वैज्ञानिकों के पास इसका सटीक उत्तर नहीं हैं, अमेरिका स्थित संक्रामक रोग विशेषज्ञ अमिता गुप्ता ने कहा कि दिल्ली और कुछ अन्य राज्यों में मामलों में वृद्धि हल्के प्रतिबंधों, महामारी के फैलाव और वायरस की उच्च संचरण क्षमता का परिणाम हो सकती है।
महामारी की शुरुआत से ही भारत के कोविड-19 मामलों पर नजर रख रहे मॉडलर मनिंद्र अग्रवाल ने इससे सहमति व्यक्त की है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के एक प्रोफेसर अग्रवाल ने पीटीआई को बताया कि सामाजिक मेलजोल में बढ़ोतरी, पाबंदियों को कम करना और मास्क अनिवार्यता को हटाना कोविड मामलों में वृद्धि के संभावित कारण हैं। अग्रवाल ने कहा, चौथी लहर का भी फिलहाल कोई संकेत नहीं है। ऐसा तभी होगा जब एक नया म्यूटेशन होगा।
कोरोना जांच की संख्या में आई कमी
महामारी विज्ञानी रामनन लक्ष्मीनारायण ने कहा कि परीक्षण दरों में गिरावट आई है, यह नहीं बताया जा सकता कि क्या सामने आ रहे नए मामले स्थिति का सही संकेत हैं। वॉशिंगटन और नई दिल्ली में सेंटर फॉर डिजीज डायनेमिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी के निदेशक लक्ष्मीनारायण ने कहा कि कोरोना जांच की संख्या कम हो गई है कई मामलों का पता नहीं चल रहा है, लेकिन जहां मामले सामने आ रहे हैं, वहां अस्पताल में भर्ती होने की संख्या पर ध्यान केंद्रित करना होगा।