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कोविड महामारी: सौम्या स्वामीनाथन बोलीं- विज्ञान ने किया शानदार काम, लेकिन वैश्विक समन्वय की रही कमी 

Thu, 24 Feb 2022 10:24 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: Amit Mandal Updated Thu, 24 Feb 2022 10:24 PM IST
सार

डब्ल्यूएचओ के मुख्य वैज्ञानिक ने आगे कहा कि हालांकि दुनिया आपूर्ति की भारी कमी के दौर से गुजर चुकी है, जिसे पूरे 2021 में देखा गया था।

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Science amazing, but no global coordination: WHO chief scientist on COVID-19 pandemic
डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन - फोटो : social media

विस्तार

कोविड-19 महामारी से निपटने के संबंध में वैज्ञानिक उपलब्धि सराहनीय है, लेकिन कुछ मुद्दों पर कोई वैश्विक समन्वय नहीं था और कई देशों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तैयार किए गए ढांचे का पालन नहीं किया। डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने गुरुवार को यह बात कही। बायोएशिया 2022 में एक पैनल चर्चा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हालांकि कई विकसित देशों ने 90 प्रतिशत की सीमा तक टीकाकरण पूरा कर लिया है, लेकिन अफ्रीका के कुछ देशों ने केवल 10 प्रतिशत टीकाकरण पूरा किया है, जबकि विश्व स्तर पर टिका आपूर्ति में आसानी थी।  

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दुनिया आपूर्ति की भारी कमी के दौर से गुजरी
मुझे लगता है कि जबकि वैज्ञानिक उपलब्धियां बिल्कुल उत्कृष्ट रही हैं, तथ्य यह है कि हमने एक वर्ष से भी कम समय में टीका विकसित कर लिया, लेकिन जिस जगह कमी रह गई वो थी वैश्विक समन्वय में कमी और महामारी के दौरान सख्त यात्रा नियम। उन्होंने कोविड -19 का एक नया संस्करण पाए जाने पर दक्षिण अफ्रीका की यात्रा को लेकर प्रतिबंधों का जिक्र किया। 
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डब्ल्यूएचओ के मुख्य वैज्ञानिक ने आगे कहा कि हालांकि दुनिया आपूर्ति की भारी कमी के दौर से गुजर चुकी है, जिसे पूरे 2021 में देखा गया था। यह चुनौती बहुत बड़ी होने वाली है क्योंकि ऐसे कई देश हैं जो बड़े पैमाने पर टीकाकरण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि डब्ल्यूएचओ उन परिदृश्यों पर काम कर रहा है जहां वैरिएंट-प्रूफ टीके विकसित किए गए हैं और सुझाव दिया है कि दुनिया भर में एक वितरण मैनुफैक्चरिंग नेटवर्क की आवश्यकता है।
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सीईओ कांत ने कहा, बायोफार्मा को प्रोत्साहित करना होगा
पैनल चर्चा में भी भाग लेने वाले नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि सरकार को अनुसंधान और विकास और बायोफार्मा जैसे क्षेत्रों को भी बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है ताकि भारत को ग्लोबल फार्मा मार्केट में बड़े भागीदार के तौर पर पहचान मिले। उन्होंने कहा कि हम इस प्रणाली को मजबूत करने के तरीकों की जांच कर रहे हैं और अधिक से अधिक उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। हमारे वैज्ञानिक समुदाय के बीच नवाचार, वैश्विक भागीदारी और ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। 

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