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पांच समुदायों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने से जुड़े मामलों के तबादले पर सुप्रीम कोर्ट राजी 

Thu, 16 Dec 2021 09:22 PM IST
Amit Mandal पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 16 Dec 2021 09:22 PM IST
सार

याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने आग्रह किया कि याचिका पर सुनवाई की जरूरत है क्योंकि इसे सुनवाई की सूची से छह बार हटाया जा चुका है।

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SC to hear plea seeking transfer of cases to itself on granting minority status
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट पांच समुदायों- मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसियों को उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अल्पसंख्यक घोषित करने की केंद्र की अधिसूचना के खिलाफ कई उच्च न्यायालयों से मामलों को स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर 7 जनवरी को सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 9 फरवरी को गृह मंत्रालय, कानून और न्याय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालयों को नोटिस जारी कर इस तरह की याचिकाओं को स्थानांतरित करने की मांग पर स्वयं ही उनकी प्रतिक्रिया मांगी थी।

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न्यायमूर्ति एसके कौल की अध्यक्षता वाली पीठ से अधिवक्ता याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने आग्रह किया कि याचिका पर सुनवाई की जरूरत है क्योंकि इसे सुनवाई की सूची से छह बार हटाया जा चुका है। उपाध्याय ने कहा कि मैंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान अधिनियम, 2004  की वैधता को चुनौती दी है। इस पर न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश सहित पीठ ने पूछा कि इसमें जल्दी क्या है। 
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उपाध्याय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही हैं और कई राज्यों में अल्पसंख्यक हिंदुओं को अल्पसंख्यकों के लाभ नहीं मिल रहा है। इससे पहले, तत्कालीन सीजेआई एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस दलील पर ध्यान दिया था कि दिल्ली, मेघालय और गुवाहाटी के उच्च न्यायालयों ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 की धारा 2 (सी) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था जिसके तहत 23 अक्टूबर 1993 को अधिसूचना जारी की गई थी।

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