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Kolkata Case: 'अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज करने में देरी बेहद परेशान करती है', कोर्ट ने कोलकाता मामले में कहा

Thu, 22 Aug 2024 02:04 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Thu, 22 Aug 2024 02:04 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने मामले में पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल पूछे। साथ ही प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से काम पर वापस लौटने को कहा।

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SC terms extremely disturbing cop delay in registering unnatural death asks protesters to return to work
Supreme Court - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर की हत्या को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने हत्याकांड में पुलिस की लापरवाही पर सख्त नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि जूनियर डॉक्टर की हत्या मामले काे अप्राकृतिक मौत के तौर पर दर्ज करने में पुलिस ने काफी देर की। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल पूछे। वहीं कोर्ट ने घटना के विरोध में प्रदर्शन और हड़ताल कर रहे डॉक्टरों से काम पर लौटने को कहा। 

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मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने मामले में पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि यह बेहद हैरानी भरा है कि मृतका का पोस्टमार्टम नौ अगस्त को शाम 6:10 बजे से 7:10 बजे के बीच हुआ। इसके बाद रात 11:30 बजे अप्राकृतिक मौत का पंजीकरण किया गया। जबकि नियमत: पोस्टमार्टम अप्राकृतिक मौत के पंजीकरण से पहले होता है।
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कोर्ट ने पूछा कि ऐसा कैसे हो सकता है? यह बेहद परेशान करने वाला तथ्य है। कोर्ट ने दुष्कर्म और हत्या का मामला दर्ज करने वाले कोलकाता पुलिस अधिकारी को अगली सुनवाई में उपस्थित होने निर्देश देते हुए मामला दर्ज करने के समय की जानकारी देने को कहा।
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सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जूनियर डॉक्टर का अंतिम संस्कार होने के बाद रात 11:45 बजे एफआईआर दर्ज की गई। राज्य पुलिस ने मृतका के परिजनों को आत्महत्या की जानकारी दी, लेकिन उन्होंने इसे हत्या कहा था। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़िता की एक मित्र को घटना को छिपाने का संदेह हुआ तो उसने वीडियोग्राफी कराने की मांग की।  

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से काम पर वापस लौटने को कहा। कोर्ट ने उन्हें काम पर वापस लौटने पर कोई कार्रवाई न होने का आश्वासन भी दिया।  एम्स नागपुर के डॉक्टरों के वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि कोलकाता मामले का विरोध करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।

इस पर कोर्ट ने कहा कि जब एक बार डॉक्टर ड्यूटी पर वापस आ जाएंगे तो हम अधिकारियों से उन पर कार्रवाई करने के लिए कहेंगे। लेकिन डॉक्टर काम नहीं करेंगे तो सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था बिगड़ जाएगी। हम सभी मरीजों के प्रति सहानुभूति रखते हैं। कोर्ट ने आश्वासन दिया कि नेशनल टास्कफोर्स सभी डॉक्टरों की बात सुनेगा। 


क्या है मामला?
सरकारी अस्पताल के सम्मेलन कक्ष में चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या की घटना के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन हो रहे हैं। आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में नौ अगस्त को महिला चिकित्सक का शव मिला था। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिफ्तार किया है।

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