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Supreme Court: चीफ जस्टिस ने कहा- जिला कोर्ट हमारी रीढ़ है, जजों के बकाया वेतन का भुगतान करें सभी राज्य

Fri, 19 May 2023 11:41 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 19 May 2023 11:41 PM IST
सार

सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि हर हाल में 30 जुलाई से पहले सभी बकाया राशि का भुगतान किया जाए। पीठ ने कहा, वेतन के बकाया के भुगतान के मामले में, इस न्यायालय ने 27 जुलाई, 2022 और 18 जनवरी, 2023 के आदेश में पहले ही 30 जून तक सभी बकाया चुकाने का आदेश दिया था।

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SC terms district judiciary as backbone asks states and UTs to pay arrears to judges as per SNJPC update news
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायपालिका को ‘न्यायिक प्रणाली की रीढ़’ बताया। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को दूसरे राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग (एसएनजेपीसी) की सिफारिशों के अनुसार देशभर में निचली अदालतों के जजों के वेतन व अन्य बकाया का भुगतान करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने पूर्व जज जस्टिस पीवी रेड्डी के नेतृत्व वाले एसएनजेपीसी की 2020 में की गई सिफारिशों को स्वीकार किया है।

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हलफनामा दाखिल करना होगा
सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि हर हाल में 30 जुलाई से पहले सभी बकाया राशि का भुगतान किया जाए। पीठ ने कहा, वेतन के बकाया के भुगतान के मामले में, इस न्यायालय ने 27 जुलाई, 2022 और 18 जनवरी, 2023 के आदेश में पहले ही 30 जून तक सभी बकाया चुकाने का आदेश दिया था। इस संबंध में, यह निर्देश दिया जाता है कि 30 जुलाई, 2023 तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अनुपालन हलफनामा दाखिल करना होगा।

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नई पेंशन दर 1 जुलाई से होगी देय
जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने अपने फैसले में कहा, इस अदालत से मंजूरी संशोधित पेंशन दर 1 जुलाई 2023 से देय होंगी। पिछले साल 27 जुलाई और इस साल 18 जनवरी के आदेशों का पालन करते हुए पेंशन, अतिरिक्त पेंशन, ग्रेच्युटी एवं अन्य सेवानिवृत्त लाभों के बकाया के भुगतान भी करने होंगे। इसमें 25 फीसदी का भुगतान 31 अगस्त तक किया जाएगा। अन्य 25 फीसदी 31 अक्तूबर तक और शेष 50 फीसदी का भुगतान 31 दिसंबर तक करना होगा।

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ई बस निविदा: हाईकोर्ट के अयोग्यता आदेश को चुनौती वाली टाटा मोटर्स की याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने टाटा मोटर्स को बड़ा झटका देते हुए महाराष्ट्र में ई-बस निविदा के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट के अयोग्यता आदेश के खिलाफ याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने कहा, वाहन निर्माता निविदा की सामग्री और आवश्यक शर्तों से भटक गया था। बेस्ट ने टाटा मोटर्स को 2450 करोड़ रुपये में 1400 इलेक्ट्रिक बसों की आपूर्ति की निविदा प्रक्रिया के लिए अयोग्य घोषित किया था और हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इस अयोग्यता को बरकरार रखा था।

सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, इसमे कोई विवाद नहीं है कि निविदा की पहली और सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता सिंगल डेकर बसों की निर्धारित परिचालन सीमा थी जिसमें बसें बिना किसी रुकावट के 80 फीसदी चार्जिंग के साथ वास्तविक स्थितियों में एक बार चार्ज करने पर लगभग 200 किमी तक चलें। अदालत के सामने रखे गए रिकॉर्ड के मुताबिक टाटा मोटर्स ने अपनी बोली में इस आवश्यकता पर जोर नहीं दिया। उसने बेस्ट को सूचित किया कि वह ऑपरेटिंग रेंज को मानक परीक्षण स्थितियों में ले जा सकती है जो निविदा शर्तों के अनुसार नहीं थी। पीठ ने कहा, हाईकोर्ट के आदेश में कोई गलती नहीं है। उसने सही व्याख्या की है कि टाटा मोटर्स ने अपनी बोली में इस शर्त का पालन नहीं किया।

एससी,एसटी एक्ट में मुकदमा चलाने से पहले आरोपी की टिप्पणी आरोपपत्र में डालें- शीर्ष कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा एससी,एसटी एक्ट में मुकदमा चलाने से पहले आरोपी की टिप्पणी   कि यह वांछनीय है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के प्रावधान के तहत किसी व्यक्ति पर मुकदमा चलाने से पहले सार्वजनिक दृश्य के भीतर किसी अभियुक्त द्वारा की गई बातों को कम से कम चार्जशीट में उल्लिखित किया जाए।  

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि इससे अदालतें अपराध का संज्ञान लेने से पहले यह निर्धारित कर पाएंगी कि आरोप पत्र अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अधिनियम के तहत एक मामला बनाता है या नहीं। 

 
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