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सुप्रीम कोर्ट: घर खरीदने वालों को हो रही दिक्कतों पर SC हुआ सख्त, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर लगाया जुर्माना
Tue, 17 Dec 2024 08:32 PM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Tue, 17 Dec 2024 08:32 PM IST
सार
घर खरीदने वालों को आ रही दिक्कतों के मामले को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जहां कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से नाराजगी जताते हुआ कहा कि अगर घर खरीदारों की शिकायतों को हल करने के लिए कोई योजना नहीं लाया गया तो वह मामले की सीबीआई जांच का आदेश दे सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को घर खरिदारों की स्थिति पर सुनवाई की। जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (जीएनआईडीए) से घर खरीदारों की शिकायतों को हल करने के लिए एक योजना पेश करने को कहा और समय पर जवाब दाखिल नहीं करने के लिए उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
मुख्य न्ययाधीश खन्ना की पीठ ने जताई नाराजगी
मामले में मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने जीएनआईडीए के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जीएनआईडीए इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार हैं। डेवलपर्स ने घर खरीदारों से पैसे लिए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप इससे बच सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जीएनआईडीए को दी चेतावनी
पीठ ने कहा कि अगर जीएनआईडीए घर खरीदारों की शिकायतों को हल करने के लिए कोई योजना नहीं लाता, तो वह मामले की सीबीआई जांच का आदेश दे सकती है। इसको लेकर सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा आप 10 दिनों में योजना पेश करें वरना हम सीबीआई जांच का आदेश देंगे। उन्होंने कहा कि आपको घर खरीदारों के हितों की रक्षा करनी होगी। आप भी इस समस्या का हिस्सा हैं।
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पीठ ने जीएनआईडीए को दिया सुझाव
पीठ ने जीएनआईडीए को यह सुझाव भी दिया कि वह सभी जमीनों को अपने कब्जे में ले और परियोजनाओं को पूरा कर घर खरीदारों को फ्लैट दे। इसके अलावा, जीएनआईडीए से यह जानकारी भी मांगी गई कि जब डेवलपर्स ने शर्तों का उल्लंघन किया तो जमीन का आवंटन रद्द क्यों नहीं किया गया।
घर खरिदारों के अधिवक्ता का तर्क
वहीं 800 से अधिक घर खरीदारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने कहा कि एक पीएसयू (सरकारी कंपनी) रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए तैयार है और किसी भी निवेशक को नुकसान नहीं होगा।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट वर्तमान में रियल्टी फर्म अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की दिवालिया कार्यवाही के संबंध में राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के फैसले के खिलाफ 12 अपीलों पर सुनवाई कर रहा था। इन परियोजनाओं में 2,900 फ्लैट्स बनने थे, लेकिन समय पर पूरी नहीं हो पाईं। इन परियोजनाओं में तीन ग्रेटर नोएडा में और दो गुरुग्राम में स्थित हैं।
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मुख्य न्ययाधीश खन्ना की पीठ ने जताई नाराजगी
मामले में मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने जीएनआईडीए के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जीएनआईडीए इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार हैं। डेवलपर्स ने घर खरीदारों से पैसे लिए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप इससे बच सकते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने जीएनआईडीए को दी चेतावनी
पीठ ने कहा कि अगर जीएनआईडीए घर खरीदारों की शिकायतों को हल करने के लिए कोई योजना नहीं लाता, तो वह मामले की सीबीआई जांच का आदेश दे सकती है। इसको लेकर सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा आप 10 दिनों में योजना पेश करें वरना हम सीबीआई जांच का आदेश देंगे। उन्होंने कहा कि आपको घर खरीदारों के हितों की रक्षा करनी होगी। आप भी इस समस्या का हिस्सा हैं।
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पीठ ने जीएनआईडीए को दिया सुझाव
पीठ ने जीएनआईडीए को यह सुझाव भी दिया कि वह सभी जमीनों को अपने कब्जे में ले और परियोजनाओं को पूरा कर घर खरीदारों को फ्लैट दे। इसके अलावा, जीएनआईडीए से यह जानकारी भी मांगी गई कि जब डेवलपर्स ने शर्तों का उल्लंघन किया तो जमीन का आवंटन रद्द क्यों नहीं किया गया।
घर खरिदारों के अधिवक्ता का तर्क
वहीं 800 से अधिक घर खरीदारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने कहा कि एक पीएसयू (सरकारी कंपनी) रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए तैयार है और किसी भी निवेशक को नुकसान नहीं होगा।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट वर्तमान में रियल्टी फर्म अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की दिवालिया कार्यवाही के संबंध में राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के फैसले के खिलाफ 12 अपीलों पर सुनवाई कर रहा था। इन परियोजनाओं में 2,900 फ्लैट्स बनने थे, लेकिन समय पर पूरी नहीं हो पाईं। इन परियोजनाओं में तीन ग्रेटर नोएडा में और दो गुरुग्राम में स्थित हैं।