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SC/ST एक्ट विवाद: सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी सरकार, BJP मंत्रियों ने बनाया दबाव 

Fri, 23 Mar 2018 08:58 AM IST
संजय मिश्र, नई दिल्ली
संजय मिश्र, नई दिल्ली Updated Fri, 23 Mar 2018 08:58 AM IST
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SC/ST Act controversy: Government to file review petition in Supreme Court
बीजेपी
एससी-एसटी एक्ट पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से संकट में फंसी केंद्र सरकार जल्द ही कोर्ट के समक्ष मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। सूत्र बताते हैं कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मामले में केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से बात की है। बताया जा रहा है कि सरकार जल्द ही सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद एससी-एसटी एक्ट को लेकर देश की सियासत गर्म है। विपक्ष ने सरकार पर दलित और आदिवासी विरोधी होने का आरोप मढ़ा है। तो सरकार के अंदर से भी पुनर्विचार याचिका की मांग उठी है। 
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केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान और केंद्रीय राज्य मंत्री राम दास अठावले ने सरकार के शीर्ष नेतृत्व से मामले में हस्तक्षेप कर पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की है। लोजपा प्रमुख राम विलास पासवान ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद दलित और आदिवासी समाज के बीच आक्रोश है। हालांकि विपक्ष खासतौर से कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए पासवान ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार कहीं से भी दलित और आदिवासी विरोधी नहीं है। 
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उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद राजग सरकार ने एससी-एसटी एक्ट में संशोधन कर उसे और मजबूत बनाया है। वर्तमान संकट न्यायालय के फैसले से पैदा हुआ है। इस मामले में उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह जल्द से जल्द पुनर्विचार याचिका दाखिल कर संसद से पारित एक्ट की रक्षा करे।
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अठावले ने की शाह से मुलाकात

SC/ST Act controversy: Government to file review petition in Supreme Court
रामदास अठावले, अमित शाह
एससी-एसटी एक्ट पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से मचे सियासी बवाल के बीच केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने गुरूवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की। उन्होंने शाह के समक्ष पूरे विस्तार से मामले को रखा। इसके बाद शाह ने केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद को फोन कर उन्हें मामले का समाधान निकालने को कहा है। शाह से मुलाकात के बाद इस आशय की जानकारी खुद अठावले ने मीडिया को दी है। इस बीच कांग्रेस ने भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकारी वकील ने सर्वोच्च न्यायालय में सही तरीके से पैरवी नहीं की है। 

दरअसल एससी-एसटी एक्ट पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि इस एक्ट के तहत तत्काल कार्रवाई नहीं होगी। न्यायालय का फैसला इस आधार पर आया है कि एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज अधिकतर मामले फर्जी होते हैं और एक्ट का सहारा लेकर निर्दोश लोगों को फंसाया जाता है। बताया जा रहा है कि आगामी लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के मामले को बड़ा मुद्दा बनाने का निर्णय लिया है। यही वजह है कि सरकार के रणनीतिकार भी मामले पर सक्रिय हो गए हैं। 

क्यों पुनर्विचार याचिका दायर करेगी सरकार 

SC/ST Act controversy: Government to file review petition in Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट
सरकार के सामने भी सियासी मजबूरी है कि ऐन चुनावी वर्ष में वह इतने बड़े वोट बैंक को सीधे अपने खिलाफ नहीं कर सकती है। पार्टी के भीतर के सांसदों और मंत्रियों में भी इस बात को लेकर चिंता बनी है। एससी और एसटी के लिए आरक्षित लोकसभा की सर्वाधिक सीटों से भाजपा के सांसद है। यही वजह है कि पुनर्विचार याचिका दायर कर सरकार न सिर्फ विपक्ष के सियासी वार को कमजोर करना चाहती है। 

बल्कि अपना आधार भी बचाए रखना चाह रही है। इस बीच सरकार के अपने मंत्रियों ने भी सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की है। हालांकि पासवान और अठावले सरीखे मंत्रियों के सुर नरम नजर आ रहे हैं। बल्कि पासवान ने लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने के मामले को लेकर कांग्रेस को आड़े हाथ लिया है। इससे भी यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय में मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। 
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