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Supreme Court: कश्मीर पर मनमोहन-मुशर्रफ फॉर्मूला लागू करने की याचिका, एससी ने लगाया  50 हजार का जुर्माना

Fri, 09 Sep 2022 10:35 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 09 Sep 2022 10:35 PM IST
सार

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता अरूप बनर्जी ने कहा कि देश ने पिछले 70 वर्षों में कश्मीर पर पाकिस्तान के साथ ढाई युद्ध लड़े हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला है।

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SC slaps cost of 50K on IIT-B graduate pitching for Manmohan-Musharraf formula to resolve Kashmir conundrum
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर विवाद के समाधान के लिए मनमोहन-मुशर्रफ के चार सूत्री फार्मूले को लागू करने की मांग करने वाले एक याचिकाकर्ता पर शुक्रवार को 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने कहा कि वह आईआईटी-बॉम्बे स्नातक प्रभाकर वेंकटेश देशपांडे द्वारा दायर याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं, जिसने याचिका में कहा था कि समस्या का सैन्य समाधान नहीं हो सकता है। देशपांडे ने पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति द्वारा तैयार किए गए तथाकथित फॉर्मूले के लिए स्वायत्तता, संयुक्त नियंत्रण, विसैन्यीकरण और खुली सीमाओं को शामिल किया गया था और इस पर आगे बातचीत की जा सकती है।

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अदालत नीति के क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकती
पीठ ने कहा कि अदालत नीति के क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकती है और याचिका प्रचार हित याचिका लगती है। शुरुआत में पीठ ने कहा कि वह याचिकाकर्ता के वकील को नोटिस पर रख रही है कि वह इस तरह की याचिकाओं के साथ अदालत का समय बर्बाद करने के लिए उस पर जुर्माना लगाएगी। पीठ ने चेतावनी दी, बेशक हम आपकी बात सुनेंगे लेकिन हम आपको नोटिस में डाल रहे हैं और जुर्माना लगाएंगे। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता अरूप बनर्जी ने कहा कि देश ने पिछले 70 वर्षों में कश्मीर पर पाकिस्तान के साथ ढाई युद्ध लड़े हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला है।
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मानहानि मामले में पूर्व पीए देवगौड़ा को सुप्रीम राहत
मानहानि के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने एक निचली अदालत के देवगौड़ा को एक कंपनी की प्रतिष्ठा के नुकसान की भरपाई के लिए 2 करोड़ रुपये हर्जाना देने के निर्देश पर रोक लगा दी थी।
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हालांकि, शीर्ष अदालत ने स्वीकार किया कि प्रभावशाली हस्तियों द्वारा कॉर्पोरेट संस्थाओं के खिलाफ दिए गए बयान उनकी प्रतिष्ठा, शेयर की कीमतों और निवेश को प्रभावित करते हैं। मालूम हो कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने 2011 में एक न्यूज चैनल से बात करते हुए नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइज (एनआईसीई) लिमिटेड पर कई तरह के आरोप लगाए थे। एनआईसीई ने इसे बेबुनियाद बताते हुए उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा कायम किया था।

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