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Supreme Court: डेढ़ साल से अधिक समय तक सूचीबद्ध नहीं हुई याचिका, SC ने अपनी ही रजिस्ट्री को जारी किया नोटिस
Tue, 01 Nov 2022 10:00 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 01 Nov 2022 10:00 PM IST
सार
अदालत ने रजिस्ट्री को आदेश दिया कि ऐसे मामलों के सभी विवरण स्पष्टीकरण के साथ पेश किए जाएं। तीन नवंबर को या उससे पहले स्पष्टीकरण दे दिया जाना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक मामले को एक पीठ के समक्ष डेढ़ साल से अधिक समय तक सूचीबद्ध न करने पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत इसे सूचीबद्ध करने और सुनवाई के लिए तैयार था। शीर्ष अदालत ने अपनी रजिस्ट्री से इस पर स्पष्टीकरण मांगा। मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ आर सुब्रमण्यम की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 के प्रावधान की वैधता को चुनौती दी गई थी और अवमानना के लिए मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई थी।
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अगस्त 2021 से 21 अक्तूबर 2022 तक सूचीबद्ध नहीं हुई याचिका
सुब्रमण्यम को याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि तत्काल याचिका 4 अगस्त, 2021 को दायर की गई थी और सूचीबद्ध होने के लिए तैयार थी। इसे 21 अक्टूबर, 2022 तक कभी भी इस अदालत के समक्ष सूचीबद्ध नहीं किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से एक प्रार्थना की गई थी, जिसमें याचिका दायर करने के बाद हुई कुछ घटनाओं के मद्देनजर तत्काल याचिका वापस लेने की स्वतंत्रता की मांग की गई थी।
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यह पूछे जाने पर कि क्या उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित अवमानना याचिका को स्थगित करने के लिए रिट याचिका के लंबित होने के तथ्य का उपयोग किसी भी तरह से किया गया था, सुब्रमण्यन ने पीठ से कहा कि उनकी ओर से किसी भी समय ऐसा कोई प्रयास नहीं किया गया था। अदालत ने कहा कि हम रजिस्ट्री को एक स्पष्टीकरण दाखिल करने के लिए नोटिस जारी करते हैं कि यह मामला सूचीबद्ध होने के लिए तैयार होने के बावजूद डेढ़ साल के दौरान अदालत के समक्ष सूचीबद्ध क्यों नहीं किया गया।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्री को यह भी बताना चाहिए कि क्या इसी तरह के कोई और मामले भी जो सूचीबद्ध होने के लिए तैयार थे और जिन्हें अदालत के समक्ष उन्हें सूचीबद्ध नहीं किया गया। ऐसे मामलों के सभी विवरण स्पष्टीकरण के साथ पेश किए जाएं। तीन नवंबर को या उससे पहले स्पष्टीकरण दे दिया जाना चाहिए।