Electoral Bonds: शीर्ष अदालत ने कहा- योजना में पारदर्शिता की जरूरत, दलों को मिले चंदे का ब्योरा दे चुनाव आयोग
संविधान पीठ ने पांच विचारों पर प्रकाश डाला, जिन पर ध्यान दिया जा सकता है। ये पांच विचार हैं, चुनाव प्रक्रिया में नकदी को कम करने की आवश्यकता, अधिकृत बैंकिंग चैनलों को प्रोत्साहित और उनके उपयोग की आवश्यकता, पारदर्शिता, दलाली और बदले की भावना को वैध बनाने पर रोकथाम।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह राजनीतिक दलों के लिए केवल नकद चंदा प्रणाली पर वापस जाने का सुझाव नहीं देगा, लेकिन मौजूदा प्रणाली की गंभीर कमियों को दूर किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि जनवरी, 2018 में शुरू की गई चुनावी बॉन्ड योजना ने चुनावी प्रक्रिया में नकदी को कम कर दिया व अधिकृत बैंकिंग चैनलों के उपयोग को प्रोत्साहित किया, लेकिन इसमें पारदर्शिता जरूरी है। रिश्वत और एक-दूसरे को लाभ पहुंचाने को वैध नहीं बनाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से देश के राजनीतिक दलों को 30 सितंबर, 2023 तक चुनावी बॉन्ड के जरिये मिले चंदे का ब्योरा देने के लिए कहा।
अदालत ने चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की संविधान पीठ ने चुनाव आयोग को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और राजनीतिक दलों से फंड का डाटा लेने और दो सप्ताह के भीतर शीर्ष अदालत के रजिस्ट्रार को सीलबंद लिफाफे में सौंपने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से यह भी पूछा कि आदेश के बावजूद 2019 के बाद कोई डाटा क्यों नहीं दाखिल किया गया?
पीठ ने कहा, 12 अप्रैल, 2019 को इस अदालत ने चुनाव आयोग को एक अंतरिम निर्देश जारी किया था। आयोग ने अप्रैल, 2019 के अंतरिम आदेश के अनुसार एक सीलबंद लिफाफे में डाटा पेश किया। इस अदालत का आदेश उस तारीख तक सीमित नहीं था, जिस दिन इसे सुनाया गया था। यदि कोई अस्पष्टता थी तो आयोग को अदालत से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए था। पीठ ने चुनाव आयोग को सुझाव दिया कि मौजूदा चुनावी बॉन्ड प्रणाली को प्रभावित करने वाली खामियों को दूर करने के लिए राजनीतिक चंदे के लिए एक वैकल्पिक प्रणाली तैयार की जा सकती है।
सिर्फ विधायिका ही कर सकती है बदलाव
पीठ ने कहा, हम केवल नकद प्रणाली में वापस नहीं जाना चाहते। हम कह रहे हैं कि इसे एक आनुपातिक और अनुरूप प्रणाली में करें जो इस चुनावी बॉन्ड प्रणाली की गंभीर कमियों को दूर कर सकती है। संविधान पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि केवल विधायिका या कार्यपालिका ही ऐसा कार्य कर सकती है और न्यायालय उस क्षेत्र में कदम नहीं उठाएगा।
इन पांच विचारों पर ध्यान दे केंद्र
संविधान पीठ ने पांच विचारों पर प्रकाश डाला, जिन पर ध्यान दिया जा सकता है। ये पांच विचार हैं, चुनाव प्रक्रिया में नकदी को कम करने की आवश्यकता, अधिकृत बैंकिंग चैनलों को प्रोत्साहित और उनके उपयोग की आवश्यकता, पारदर्शिता, दलाली और बदले की भावना को वैध बनाने पर रोकथाम।
ये है प्रणाली की गड़बड़ी
सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, पहले शुद्ध लाभ का केवल एक प्रतिशत दान करने की अनुमति थी। अब शून्य टर्नओवर वाली कंपनी भी दान कर सकती है। एसजी मेहता ने कहा, केवल लाभ कमाने वाली कंपनी ही दान कर सकती है। हालांकि सीजेआई ने कहा कि किसी कंपनी द्वारा केवल एक विशिष्ट प्रतिशत के दान की अनुमति देने की आवश्यकता के अभाव में मात्र एक रुपये लाभ वाली कंपनी भी दान कर सकती है।