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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, तेलंगाना सरकार के आदेश को गई थी चुनौती

Mon, 06 Oct 2025 05:47 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 06 Oct 2025 05:47 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार के 42 फीसदी ओबीसी आरक्षण वाले आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की अनुमति दी। याचिका में दावा किया गया था कि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50 फीसदी आरक्षण सीमा का उल्लंघन करता है।  

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SC refuses to entertain plea against Telangana's order on 42 pc quota to Backward Classes
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तेलंगाना सरकार के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों को 42 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने जब संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई की इच्छा नहीं जताई, तब याचिकाकर्ता के वकील ने इसे वापस ले लिया और इसके साथ ही हाईकोर्ट का रुख करने की अनुमति मांगी। 
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याचिका में क्या कहा गया था?
26 सितंबर 2025 को जारी सरकारी आदेश (जीओ) में पिछड़े वर्गों को 42 फीसदी आरक्षण देने की बात कही गई थी। याचिका में कहा गया कि इस आदेश के कारण स्थानीय निकायों में कुल आरक्षण 67 फीसदी हो गया है। याचिका में यह दावा किया गया था कि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय की गई 50 फीसदी आरक्षण की सीमा का उल्लंघन करता है। 
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आठ अक्तूबर को हाईकोर्ट में तय है सुनवाई
शुरुआत में ही बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि उन्होंने सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख अनुच्छेद 32 के तहत क्यों किया, जबकि यह अनुच्छेद केवल उन मामलों में प्रयोग होता है जहां मौलिक अधिकारों का हनन हुआ हो। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कुछ याचिकाकर्ता पहले ही तेलंगाना हाईकोर्ट जा चुके हैं, जहां इस मामले की सुनवाई आठ अक्तूबर को तय है। उन्होंने यह भी बताया कि हाईकोर्ट ने सरकारी आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पूछा, अगर हाईकोर्ट रोक नहीं लगाता तो आप अनुच्छेद 32 के तहत यहां आ जाएंगे? इसके जवाब में याचिकाकर्ता के वकील ने निवेदन किया कि उन्हें याचिका वापस लेने और हाईकोर्ट में जाने की अनुमति दी जाए। 


हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं में क्या कहा गया?
हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में यह दलील दी गई है कि स्थानीय निकायों के आगामी चुनाव में 42 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था 50 फीसदी की कानूनी सीमा को पार कर रही है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के खिलाफ है। इससे पहले, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 30 सितंबर तक ग्राम पंचायतों के चुनाव कराने का निर्देश दिया था।

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तेलंगाना सरकार ने पूरा किया था चुनावी वादा
चुनावी वादा पूरा करते हुए तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों को 42 फीसदी आरक्षण देने का आदेश जारी किया था। इस सरकारी आदेश में कहा गया है कि संविधान का अनुच्छेद 243 (डी) (6) राज्य को किसी भी पंचायत या पंचायत स्तर पर अध्यक्ष पदों में पिछड़े वर्गों के पक्ष में आरक्षण का प्रावधान करने का अधिकार देता है। सरकार ने कहा कि उसने सामाजिक-आर्थिक, शैक्षिक, रोजगार, राजनीतिक और जातिगत सर्वेक्षण कराया, जिससे राज्य में विभिन्न जातियों की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक, रोजगार और राजनीतिक स्थिति का आकलन किया गया।

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