Supreme Court: बैडमिंटन स्टार लक्ष्य सेन को बड़ी राहत, कोर्ट ने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले में रद्द की एफआईआर
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन, उनके परिवार और कोच के खिलाफ जन्म प्रमाणपत्र में फर्जीवाड़े की प्राथमिकी को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी नए सबूत के दोबारा जांच शुरू करना न्याय की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। पहले की जांचों में आरोप खारिज हो चुके हैं, और ऐसे खिलाड़ियों को बेवजह मुकदमे में घसीटना अनुचित है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन, उनके परिवार और कोच के खिलाफ जन्म प्रमाणपत्र में फर्जीवाड़े के मामले में दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि यह मामला अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इसे आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं है।
जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने कहा कि जिन आरोपों की पहले सक्षम अधिकारियों द्वारा जांच की जा चुकी है और जिन्हें खारिज कर दिया गया था, उन्हें अब बिना किसी नए सबूत के फिर से उठाने की कोशिश की जा रही है। कोर्ट ने पाया कि दोबारा जांच शुरू करने के लिए कोई वैध आधार नहीं है।
ये भी पढ़ें: बिहार में चुनाव आयोग की SIR पर फिलहाल रोक नहीं, अदालत ने कहा- आधार और वोटर ID पर विचार करे EC
बेंच ने कहा, अपीलकर्ता (खासतौर पर अपीलकर्ता 1 और 3) राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और कॉमनवेल्थ गेम्स व बीडब्ल्यूएफ के आयोजनों में कई पदक जीते हैं। कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसे खिलाड़ियों को, जिनका रिकॉर्ड साफ-सुथरा रहा है और जिन्होंने देश का नाम रोशन किया है, उन्हें बिना किसी स्पष्ट सबूत के आपराधिक मुकदमे में घसीटना न्याय के मूल उद्देश्य के खिलाफ है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता एम. जी. नागराज ने आरोप लगाया था कि लक्ष्य सेन और उनके भाई चिराग सेन की जन्म तिथि में गड़बड़ी है। उनका दावा था कि उनके माता-पिता, कोच यू. विमल कुमार और कर्नाटक बैडमिंटन संघ के एक कर्मचारी ने जन्म प्रमाणपत्रों में उम्र लगभग ढाई साल कम दिखाई, ताकि वे आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में खेल सकें और सरकारी लाभ उठा सकें।
शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (फर्जीवाड़ा) और 471 (फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। हालांकि, सेन परिवार ने 2022 में कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस प्राथमिकी पर रोक लगवा दी थी।
ये भी पढ़ें: 'मध्य प्रदेश के नेता विजय शाह की नीयत पर संदेह', अदालत ने कहा- 13 अगस्त तक जांच रिपोर्ट दे SIT
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि इस मामले की पहले से ही जांच हो चुकी है। 2016 में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने इस पर जांच शुरू की थी, जिसमें एम्स दिल्ली जैसे सरकारी अस्पतालों में बोन ओसिफिकेशन और डेंटल टेस्ट कराए गए थे। इन जांचों में खिलाड़ियों की जन्म तिथि वही पाई गई, जो दस्तावेजों में दर्ज थी। इसके आधार पर साई ने मामला बंद कर दिया और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने भी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश नहीं की।
शीर्ष कोर्ट ने यह भी माना कि शिकायतकर्ता नागराज की मंशा संदेह के घेरे में है, क्योंकि उनकी बेटी को 2020 में प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी में दाखिला नहीं मिला था, जहां कोच विमल कुमार भी कार्यरत हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उसने प्राथमिकी को बरकरार रखा था और कहा कि इस तरह के मामलों में आपराधिक कानूनों का उपयोग नहीं किया जा सकता। शीर्ष कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे खिलाड़ियों को अनावश्यक रूप से आपराधिक मुकदमों में फंसाना सही नहीं होगा।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.