{"_id":"5def76568ebc3e879a408765","slug":"sc-posts-for-hearing-on-28-january-pleas-relating-to-grant-quota-promotions-to-scs-and-st","type":"story","status":"publish","title_hn":"एससी-एसटी आरक्षण : केंद्र की याचिका पर 28 जनवरी को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
एससी-एसटी आरक्षण : केंद्र की याचिका पर 28 जनवरी को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
Tue, 10 Dec 2019 04:18 PM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 10 Dec 2019 04:18 PM IST
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकारी नौकरियों में एससी और एसटी को पदोन्नति के लिए कोटा देने से संबंधित याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 28 जनवरी, 2020 का दिन तय किया है।
इससे पहले केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि एससी/एसटी समुदाय के क्रीमी लेयर को आरक्षण के लाभों से बाहर रखने वाले 2018 के उसके आदेश को पुनर्विचार के लिए सात सदस्यीय पीठ के पास भेजा जाए।
पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 2018 में कहा था कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के समृद्ध लोग यानी कि क्रीमी लेयर को कॉलेज में दाखिले तथा सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
विज्ञापन
इस मुद्दे पर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही प्रधान न्यायाधीश बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि एससी/एसटी की क्रीमी लेयर को आरक्षण के लाभ से बाहर रखने या न रखने के पहलू पर दो सप्ताह बाद विचार किया जाएगा।
इसे लेकर समता आंदोलन समिति और पूर्व आईएएस अधिकारी ओ पी शुक्ला ने नई याचिका दायर की थी।
एक जनहित याचिका में एससी/एसटी की क्रीमी लेयर की पहचान के लिए तर्कसंगत जांच करने और उन्हें एससी/एसटी की नॉन क्रीमी लेयर से अलग करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
विज्ञापन
Supreme Court posts for hearing on January 28, 2020 the pleas relating to grant of quota for promotions in the government jobs to SCs and STs. pic.twitter.com/lKVYV7WOhj
— ANI (@ANI) December 10, 2019
इससे पहले केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि एससी/एसटी समुदाय के क्रीमी लेयर को आरक्षण के लाभों से बाहर रखने वाले 2018 के उसके आदेश को पुनर्विचार के लिए सात सदस्यीय पीठ के पास भेजा जाए।
विज्ञापन
पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 2018 में कहा था कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के समृद्ध लोग यानी कि क्रीमी लेयर को कॉलेज में दाखिले तथा सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
विज्ञापन
इस मुद्दे पर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही प्रधान न्यायाधीश बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि एससी/एसटी की क्रीमी लेयर को आरक्षण के लाभ से बाहर रखने या न रखने के पहलू पर दो सप्ताह बाद विचार किया जाएगा।
इसे लेकर समता आंदोलन समिति और पूर्व आईएएस अधिकारी ओ पी शुक्ला ने नई याचिका दायर की थी।
एक जनहित याचिका में एससी/एसटी की क्रीमी लेयर की पहचान के लिए तर्कसंगत जांच करने और उन्हें एससी/एसटी की नॉन क्रीमी लेयर से अलग करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।