{"_id":"63387a075ea6d110f644d209","slug":"sc-notice-to-tn-govt-on-plea-alleging-deputation-of-government-employees-for-administration-of-temples","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: सर्वोच्च अदालत का तमिलनाडु सरकार को नोटिस, मंदिरों में सरकारी अफसरों की नियुक्ति का आरोप","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: सर्वोच्च अदालत का तमिलनाडु सरकार को नोटिस, मंदिरों में सरकारी अफसरों की नियुक्ति का आरोप
Sat, 01 Oct 2022 11:04 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 01 Oct 2022 11:04 PM IST
सार
याचिकाकर्ता टी. आर. रमेश की ओर पेश हुए वकील ने तर्क दिया कि तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 की धारा 55 (1) के अनुसार केवल मंदिर के ट्रस्टी ही मंदिरों के प्रशासन के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकते हैं।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सर्वोच्च अदालत ने तमिलनाडु सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें राज्य के मंदिरों में प्रशासन के लिए सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति का आरोप लगाया गया है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
विज्ञापन
पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील सी.एस. वैद्यनाथन से एक और हलफनामा दायर करने को कहा जिसमें तमिलनाडु के उन मंदिरों की संख्या जानकारी दी जाएगी जहां कोई ट्रस्टी नियुक्त नहीं किया गया है। इसके अलावा उन मंदिरों की संख्या भी बतानी होगी जिनमें सरकारी अफसरों की नियुक्ति की गई है।
विज्ञापन
इससे पहले याचिकाकर्ता टी. आर. रमेश की ओर पेश हुए वकील ने तर्क दिया कि तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 की धारा 55 (1) के अनुसार केवल मंदिर के ट्रस्टी ही मंदिरों के प्रशासन के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण एक दशक से भी ज्यादा समय से ट्रस्टियों की नियुक्ति नहीं हुई है।
विज्ञापन
याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार, मंदिरों के प्रशासन के लिए कार्यकारी अधिकारियों (एग्जीक्यूटिव ऑफिसर्स) के अलावा सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति कर रही है।