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सुप्रीम कोर्ट: पूरे देश के लिए एक संवैधानिक धर्म की मांग, उच्चतम न्यायालय ने खारिज की याचिका

Mon, 18 Sep 2023 04:34 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 18 Sep 2023 04:34 PM IST
सार

पीठ ने याचिकाकर्ता के रूप में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए व्यक्ति से पूछा,'आप कहते हैं कि एक संवैधानिक धर्म होना चाहिए। क्या आप लोगों को अपने धर्मों का पालन करने से रोक सकते हैं?' 

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SC junks petition seeking single constitutional religion for entire country
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को देश में एकल संवैधानिक धर्म की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह लोगों को उनके संबंधित धार्मिक विश्वासों का पालन करने से रोक सकते हैं। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि उन्हें इस तरह की याचिका दायर करने का विचार कहां से आया।

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पीठ ने याचिकाकर्ता के रूप में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए व्यक्ति से पूछा,'आप कहते हैं कि एक संवैधानिक धर्म होना चाहिए। क्या आप लोगों को अपने धर्मों का पालन करने से रोक सकते हैं?' 
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याचिकाकर्ता वकील नहीं हैं, लेकिन उन्हें रजिस्ट्रार द्वारा अदालत में अपना मामला पेश करने की अनुमति दी गई है। मुकेश कुमार और मुकेश मनवीर सिंह ने यह याचिका दायर की है। पीठ ने उनमें से वहां मौजूद एक से पूछा, यह क्या है? आप इस याचिका में क्या चाहते हैं?
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याचिकाकर्ता ने कहा कि वह एक सामाजिक कार्यकर्ता है और उसने भारत के लोगों की ओर से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत जनहित याचिका दायर की है जिसमें 'एक संवैधानिक धर्म' की मांग की गई है। अदालत ने पूछा, 'किस आधार पर?'

पीठ ने कहा कि याचिका में 1950 के एक संवैधानिक आदेश को रद्द करने की मांग की गई है। हालांकि, इसमें यह उल्लेख नहीं किया गया है कि वह किस संवैधानिक आदेश का जिक्र कर रहा है। इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।


संविधान का अनुच्छेद 32 देश के नागरिकों को यह अधिकार देता है कि यदि उन्हें लगता है कि उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया है तो वे उचित कार्यवाही के माध्यम से शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

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