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Hate Speech: नफरती भाषण मामले में नोडल अधिकारी नियुक्ति नहीं करने पर चार राज्यों को नोटिस, अदालत ने कही यह बात
Thu, 30 Nov 2023 06:43 AM IST
गुलाम अहमद
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Thu, 30 Nov 2023 06:43 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, नफरत फैलाने वाले भाषण को अदालत ने परिभाषित किया है और सवाल कार्यान्वयन और समझने का है कि इसे कैसे लागू किया जाए। यदि इसमें कोई उल्लंघन होता है तो आप संबंधित हाईकोर्ट से संपर्क कर सकते हैं। हम देशभर के मामलों को नहीं ले सकते क्योंकि हमारे लिए इसे संभालना असंभव होगा।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह देशभर में नफरती भाषणों के एक-एक व्यक्तिगत मामलों से नहीं निपट सकता। ऐसा करने से इन मामलों की बाढ़ आ जाएगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह देशभर में नफरती भाषणों के मामलों से निपटने के लिए एक प्रशासनिक तंत्र स्थापित करने पर विचार कर रहा है। साथ ही चार राज्यों को नोडल अधिकारी नियुक्त न करने पर नोटिस जारी किया।
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पीठ ने कहा, नफरत फैलाने वाले भाषण को अदालत ने परिभाषित किया है और सवाल कार्यान्वयन और समझने का है कि इसे कैसे लागू किया जाए। यदि इसमें कोई उल्लंघन होता है तो आप संबंधित हाईकोर्ट से संपर्क कर सकते हैं। हम देशभर के मामलों को नहीं ले सकते क्योंकि हमारे लिए इसे संभालना असंभव होगा। भारत जैसे बड़े देश में समस्याएं तो होंगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या हमारे पास जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त प्रशासनिक तंत्र है। समाज को पता होना चाहिए कि यदि आप इसमें शामिल होंगे तो कुछ राज्य कार्रवाई होगी।
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पहले कहा था-नफरत फैलाने वाले भाषण को परिभाषित करना जटिल
पीठ ने नोडल अधिकारियों की नियुक्ति न होने पर तमिलनाडु, केरल, नगालैंड और गुजरात को भी नोटिस जारी किया। शीर्ष अदालत ने पहले कहा था कि नफरत फैलाने वाले भाषण को परिभाषित करना जटिल है, लेकिन इससे निपटने में असली समस्या कानून और न्यायिक घोषणाओं के कार्यान्वयन और क्रियान्वयन में है। पिछले साल 21 अक्तूबर को शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड को नफरत भरे भाषण देने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया था और इसे धर्म-तटस्थ देश के लिए चौंकाने वाला बताया था। यह मानते हुए कि भारत का संविधान एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की परिकल्पना करता है, अदालत ने तीनों राज्यों को शिकायत दर्ज होने की प्रतीक्षा किए बिना अपराधियों के खिलाफ तुरंत आपराधिक मामले दर्ज करने का निर्देश दिया था।
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