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Hindi News ›   India News ›   SC issues notice to Centre on plea against NGT order asking to ban water purifiers where TDS below 500 mg per litre

वाटर प्यूरीफायर प्रतिबंध मामला: एनजीटी के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस 

Tue, 01 Mar 2022 07:28 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Amit Mandal Updated Tue, 01 Mar 2022 07:28 PM IST
सार

वाटर प्यूरीफायर पर प्रतिबंध लगाने के मामले में एनजीटी के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया है।  

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SC issues notice to Centre on plea against NGT order asking to ban water purifiers where TDS below 500 mg per litre
सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस - फोटो : PTI

विस्तार

500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम टीडीएस वाले वाटर प्यूरीफायर पर प्रतिबंध लगाने के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया है। पिछले साल दिसंबर में एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को निर्देश दिया था कि वह उन सभी आरओ निर्माताओं को वाटर प्यूरीफायर पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश जारी करे, जहां पानी में कुल घुलित ठोस (टीडीएस) का स्तर 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीपीसीबी को कार्टिजेस सहित आरओ खारिज करने के प्रबंधन पर निर्देश जारी करने को भी कहा था।

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सीपीसीबी को दिया था निर्देश
पीठ ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के साथ पठित इस ट्रिब्यूनल के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए हम सीपीसीबी को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत सभी निर्माताओं को इस ट्रिब्यूनल के आदेशों के अनुसार एक उचित आदेश जारी करने का निर्देश देते हैं। इसे अगले एक महीने के भीतर लागू किया जाए। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पर्यावरण एवं वन मंत्राल द्वारा जल शोधन प्रणाली के उपयोग पर नियमन पर जारी गजट अधिसूचना को उसके आदेश का अनुपालन नहीं कहा जा सकता है।
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पीठ ने कहा था कि जहां टीडीएस 500 मिलीग्राम/लीटर से कम है, वहां आरओ सिस्टम को विनियमित और प्रतिबंधित करने का कोई प्रावधान नहीं है, जैसा कि इस ट्रिब्यूनल द्वारा निर्देशित किया गया है। आरओ रिजेक्ट का कोई आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन भी नहीं है। इसी तरह पानी की बर्बादी का मुद्दा अनसुलझा रहता है।  

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