Supreme Court: शवों को संभालने के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति की जरूरत; पढ़ें शीर्ष कोर्ट की अहम खबरें
नगालैंड विधानसभा की तरफ से म्युनिसिपल एक्ट को निरस्त करने और शहरी निकायों के चुनाव न कराने के संकल्प वाले प्रस्ताव पर शीर्ष कोर्ट ने नाराजगी जताई। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि निर्धारित कानूनों का पालन होना चाहिए। पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें..
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कई अहम मामलों पर सुनवाई की। इस दौरान एनडीपीएस मामले में आरोपी एक व्यक्ति को मेडिकल आधार पर शीर्ष कोर्ट ने जमानत दे दी। इसके अलावा, नगालैंड विधानसभा की तरफ से म्युनिसिपल एक्ट को निरस्त करने और शहरी निकायों के चुनाव न कराने के संकल्प वाले प्रस्ताव पर शीर्ष कोर्ट ने नाराजगी जताई। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि निर्धारित कानूनों का पालन होना चाहिए। पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें..
एनडीपीएस मामले में आरोपी को दी जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने मादक द्रव्य रोधी कानून (एनडीपीएस) के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी की जमानत पर सुनवाई की। जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दे दी।
जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने व्यक्ति की चिकित्सा स्थिति के आधार पर यह भी कहा कि वह एक साल और सात महीने से अधिक समय से जेल में है। पीठ ने कहा, जेल में उन्नत उचित चिकित्सा उपचार नहीं मिलने के कारण याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाता है। निचली अदालत उसकी जमानत की शर्तें निर्धारित कर सकती है। शीर्ष अदालत ने मार्च में आरोपी को अंतरिम जमानत दी थी।
आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता नमित सक्सेना ने कहा कि आरोपी 10 किलो गांजा रखने के लिए नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 8(सी), 20(बी) और 29 के तहत आरोप लगाए गए थे। उन्होंने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल की तबीयत बिगड़ गई है और वह फिलहाल वेंटिलेटर सपोर्ट पर है।
शीर्ष अदालत ने यह आदेश गुजरात हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली सलीम मजोठी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। गुजरात हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया था कि गुजरात हाई कोर्ट ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखे बिना कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कथित अपराध में उसकी संलिप्तता दिखाने के लिए कुछ भी नहीं मिला, उसकी याचिका खारिज कर दी।
नगालैंड शहरी निकाय चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा-कानूनों का पालन होना चाहिए
नगालैंड विधानसभा की तरफ से म्युनिसिपल एक्ट को निरस्त करने और शहरी निकायों के चुनाव न कराने के संकल्प वाला प्रस्ताव पारित किए जाने पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि निर्धारित कानूनों का पालन होना चाहिए।
जस्टिस एस.के. कौल और जस्टिस ए. अमानुल्लाह की पीठ राज्य में स्थानीय निकायों के चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है। शीर्ष अदालत ने 5 अप्रैल को नगालैंड में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को अगले आदेश तक रद्द करने वाली 30 मार्च की अधिसूचना पर रोक लगा दी थी। आदिवासी संगठनों और नागरिक समाज समूहों के दबाव में नागालैंड विधानसभा ने म्युनिसिपल एक्ट निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया है। 30 मार्च को राज्य चुनाव आयोग ने इसके मद्देनजर अगले आदेश तक पूर्व में चुनाव कार्यक्रम रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी।
व्यक्तिगत अधिकारों पर असर नहीं
पीठ ने बृहस्पतिवार की सुनवाई के दौरान कहा कि यह कुछ ऐसा नहीं है जो राज्य के हितों के विपरीत हो। आखिरकार लोग चुनाव में अपने प्रतिनिधियों का ही चुनाव तो करेंगे। वे जमीनी स्तर पर उनके हितों की देखभाल करेंगे और इसमें किसी को आपत्ति कैसे हो सकती है? पीठ ने कहा, हम स्थानीय भावनाओं का सम्मान करते हैं लेकिन देश के कानून का पालन होना चाहिए और ये केंद्र सरकार का कर्तव्य है कि वो इसका समाधान निकाले। ऐसी स्थिति में कानून का पालन न होने का क्या मतलब है जबकि इससे राज्य के लोगों के व्यक्तिगत अधिकारों या कानूनों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है
नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत सामाजिक कार्यकर्ता की बेटी को दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में गुरुवार को सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने दिवंगत दाभोलकर की की बेटी को अपनी याचिका की एक प्रति सीबीआई को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इस याचिका में उन्होंने मांग की है कि बंबई हाई कोर्ट नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड की जांच की निगरानी जारी रखे।
गौरतलब है कि अंधविश्वास के खिलाफ लड़ने वाले दाभोलकर की 20 अगस्त, 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान बाइक सवार दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने याचिकाकर्ता मुक्ता दाभोलकर से जांच एजेंसी को याचिका की प्रति उपलब्ध कराने को कहा है।
मुक्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने कहा कि हाई कोर्ट ने मामले की जांच की निगरानी करना बंद कर दिया है। वहीं जांच एजेंसी ने कहा है कि दो भगोड़े आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है और हत्या में बड़ी साजिश का पता लगाने के लिए और समय की जरूरत है।
CJI ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में ट्रेनिंग-सह-परीक्षा केंद्र का उद्घाटन किया
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के अतिरिक्त भवन परिसर में ट्रेनिंग सह परीक्षा केंद्र का उद्घाटन किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में एक बयान भी जारी किया है। इसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के ट्रेनिंग प्रकोष्ठ द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए ई-फाइलिंग, ई-ऑफिस और अन्य कौशल में जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। साथ ही नव नियुक्त कर्मियों के लिए प्रारंभिक प्रशिक्षण और पदोन्नत अधिकारियों के लिए उन्मुखीकरण प्रशिक्षण नियमित आधार पर होते हैं। इसके साथ ही कार्यस्थल पर तनाव प्रबंधन, चिंता प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
बयान में यह भी कहा गया है कि ट्रेनिंग-सह-परीक्षा केंद्र प्रभावी ट्रेनिंग और परीक्षाओं के लिए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। सुप्रीम कोर्ट में प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के आसान कामकाज के लिए एक इन-हाउस सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है।
शवों को संभालने के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति की जरूरत : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि महामारी और गैर-महामारी के समय में शवों को गरिमापूर्ण तरीके से संभालने के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति की जरूरत है। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ ने एक वकील की पीड़ा को साझा किया। वकील ने कहा कि उसका मुवक्किल न तो अपनी मृत मां का चेहरा देख सका है और न ही महामारी के दौरान उसका अंतिम संस्कार कर पाया। जबकि उसकी मां की मौत कोविड-19 के संक्रमण से नहीं हुई थी।
पीठ ने कहा, हम आपकी पीड़ा को दूर तो नहीं कर सकते, लेकिन हम इसके माध्यम से दूसरों के लिए स्थिति बेहतर कर सकते हैं। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से वकील के साथ शवों को संभालने की मौजूदा राष्ट्रीय नीति की प्रति साझा करने को कहा। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से वकील के साथ शवों को संभालने की मौजूदा राष्ट्रीय नीति की प्रति साझा करने को कहा। संबंधित नीति पर वकील के सुझाव लेने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से सभी राज्यों के साथ मिलकर एक समान नीति सुनिश्चित करने के लिए कहा जाएगा। पीठ ने कहा, शवों को संभालने के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता है।
दलितों की स्थिति का जायजा लेने के लिए बिहार पहुंचा एनसीएससी का दल
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के अध्यक्ष विजय सांपला की अध्यक्षता में एक दल बृहस्पतिवार को दलितों के साथ होने वाले भेदभाव और उनके कल्याण के लिए किए गए उपायों का जायजा लेने के लिए बिहार पहुंचा।
दो दिवसीय दौरे के पहले दिन सांपला ने अनुसूचित जाति के सांसदों और विधायकों के अलावा राज्य सरकार के अधिकारियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस दौरान राज्य में अनुसूचित जाति समुदाय पर अत्याचार, संस्थागत भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार के कई मामले राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से उठाए गए।
शीर्ष कोर्ट ने आरोपी की जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सीबीआई को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री वाईएस विवेकानंद रेड्डी की हत्या के आरोपी को जमानत के मामले में सीबीआई और आरोपी को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, यह क्या आदेश है? हाईकोर्ट जमानत रद्द करता है और फिर उसे यह कहते हुए मंजूर कर लेता है कि उसे एक जुलाई को रिहा किया जाए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को 30 जून तक जांच पूरी करने को कहा था।
शीर्ष अदालत मृतक की बेटी सुनीता नरेड्डी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी टी गंगी रेड्डी उर्फ येरा गंगी रेड्डी को सशर्त जमानत देने के हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रामनवमी हिंसा की NIA जांच का किया विरोध
पश्चिम बंगाल में रामनवमी उत्सव के दौरान हुई हिंसा की घटनाओं की जांच एनआईए को स्थानांतरित करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया। शीर्ष अदालत में पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि हिंसा की घटनाओं में पुलिस द्वारा किसी भी विस्फोटक के इस्तेमाल का कोई मामला नहीं पाया गया है। जिससे एनआईए को शामिल किया गया है।
शीर्ष अदालत विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ के समक्ष अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि बमों के इस्तेमाल से जुड़ी कोई घटना नहीं हुई है। पुलिस ने सभी पहलुओं पर गौर किया है और प्राथमिकी दर्ज की है।
इस पर पीठ ने मामले में एफआईआर का जिक्र करते हुए कहा कि विस्फोटकों का उपयोग एक अनुसूचित अपराध है, जिसके लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को जांच के लिए बुलाया जा सकता है। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में दर्ज किया है कि पुलिस ने जानबूझकर विस्फोटक पदार्थ अधिनियम को लागू करने के संबंध में दर्ज एफआईआर में छोड़ दिया है।