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मेडिकल कॉलेज एडमिशन घोटाला: HC के पूर्व जज पर करप्शन का आरोप, सुनवाई करेगी पांच जजों की पीठ

Fri, 10 Nov 2017 09:38 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Fri, 10 Nov 2017 09:38 AM IST
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SC five judges bench will hear on medical admission case in which former HC judge also involved

सुप्रीम कोर्ट ने देश के संवैधानिक अदालतों के कार्यरत और सेवानिवृत्त जज पर कथित तौर पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप की सघनता से जांच करने की गुहार वाली याचिका पर परीक्षण करने का निर्णय लिया है। न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने गुरुवार को वकील कामिनी जायसवाल द्वारा दायर जनहित याचिका को जल्द सुनवाई के बात कहते हुए इसे पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेज दिया है। 

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सोमवार को पांच सदस्यीय संविधान पीठ इस इस मामले पर सुनवाई करेगी। पीठ ने कहा कि यह मामला न्यायपालिका और देश के लिए महत्वपूर्ण है। पीठ ने याचिका पर केंद्र सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी किया है। साथ ही पीठ ने सीबीआई को मामले की जांच से संबंधित तमाम दस्तावेजों को सील बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने के लिए कहा है। 
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याचिका में इस आपराधिक मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने की गुहार की गई है। संभव है कि इसकेतहत जजों केखिलाफ भी जांच संभव है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के तीन सेवानिवृत्त जज के खिलाफ इस तरह केआरोपों वाली याचिका को सुनवाई केपहले दिन ही खारिज कर दिया गया था। 
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पढ़ें: ओडिशा: रिटायर्ड जज के घर छापेमारी पर कोर्ट ने CBI, केंद्र और राज्य सरकार को भेजा नोटिस


यह जनहित याचिका कुछ मेडिकल कॉलेजों के पंजीकरण देने में हुए भ्रष्टाचार को लेकर है। इस मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व जज आईएम कुदैशी सहित अन्य को गिरफ्तार किया था। पूर्व जज पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी और निजी लोगों के साथ साजिश रचकर निजी मेडिकल कॉलेजों के पक्ष में फैसला दिलाने का प्रयास किया था। 

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने पीठ केसमक्ष कहा कि यह मामले में सुप्रीम कोर्ट को दखल देना चाहिए। उन्होंने सीबीआई पर आरोप लगाया कि न्यायपालिका को बदनाम करने के लिए उसने एफआईआर दर्ज की है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को गिरफ्तार करने के48 घंटे के भीतर सभी को जमानत मिल गई लेकिन सीबीआई ने इसे चुनौती दी। उन्होंने इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट केपूर्व न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी जांच कराने की मांग की। 

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