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SC: समय से पहले रिहाई की याचिका पर सुनवाई में देरी से शीर्ष अदालत नाराज, यूपी कारागार महानिदेशक को दी चेतावनी
Sun, 15 Jan 2023 06:25 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sun, 15 Jan 2023 06:25 PM IST
सार
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित कानून के मद्देनजर, इस तरह के आवेदनों पर नीति के आधार पर विचार करने की आवश्यकता है।
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक दोषी की समय से पहले रिहाई की याचिका पर सुनवाई में अधिकारियों द्वारा देरी किए जाने पर नाराजगी जताई है। इतना ही नहीं शीर्ष अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के कारागार महानिदेशक और अन्य को चेतावनी दी है। अदालत ने कहा कि अगर आगे भी ऐसे मामले सामने आए तो दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
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शीर्ष अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, समय से पहले रिहाई का आवेदन सितंबर 2019 से लंबित है। साथ ही सेंट्रल जेल, फतेहगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा इस साल 5 जनवरी को जारी किए गए हिरासत प्रमाण पत्र के अनुसार, दोषी को बिना छूट के 15 साल और 14 दिनों तक हिरासत में रखा गया है।
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इस मामले में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित कानून के मद्देनजर, इस तरह के आवेदनों पर नीति के आधार पर विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि यह दोषसिद्धि की तारीख पर थी।
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पीठ ने 13 जनवरी को दिए गए अपने आदेश में कारागार महानिदेशक को यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए कि समय पूर्व रिहाई के लिए आवेदन पर विधिवत विचार किया जाए और उसके आदेश की तारीख से एक महीने के भीतर इसका निपटारा किया जाए। साथ ही शीर्ष अदालत ने आदेश के अनुपालन के संबंध में एक हलफनामा 15 फरवरी तक अदालत के समक्ष दायर किया जाए।
इसके साथ ही पीठ ने जेल महानिदेशक और सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया है कि यदि ऐसे आवेदनों से निपटने में अधिकारियों की अवज्ञा के अन्य मामले संज्ञान में आए तो यह अदालत उचित कानून के तहत उनके खिलाफ कार्यवाही के लिए विवश होगी।