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SC: 'अगर आप राजनेता हैं तो आपको मोटी चमड़ी रखनी चाहिए', कोर्ट ने खारिज की सीएम रेवंत के खिलाफ भाजपा की याचिका

Mon, 08 Sep 2025 11:38 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 08 Sep 2025 11:38 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भाजपा की तेलंगाना इकाई की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाषण को लेकर मानहानि का मुकदमा खारिज करने के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी। 

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SC dismisses Telangana BJP plea against order quashing defamation case against Chief Minister Revanth Reddy
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा तेलंगाना) की ओर से राज्य के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है। इस याचिका में रेवंत रेड्डी के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों के मामले को रद्द करने के तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान रेवंत रेड्डी ने कहा था कि अगर भाजपा तेलंगाना में सत्ता में आती है तो वह आरक्षण समाप्त कर देगी।

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'शीर्ष अदालत को राजनीतिक लड़ाई लड़ने के मंच में नहीं बदला जाना चाहिए'
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को यह कहते हुए मामले को खारिज कर दिया कि शीर्ष अदालत को राजनीतिक लड़ाई लड़ने के मंच में नहीं बदला जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, 'यदि आप एक राजनेता हैं, तो आपके पास इन सब चीजों को सहने के लिए मोटी चमड़ी होनी चाहिए।'
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कोर्ट ने क्या कहा?
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं है। पीठ ने कहा, 'हम बार-बार कह रहे हैं कि इस अदालत का इस्तेमाल राजनीतिक लड़ाई के लिए न करें। खारिज। अगर आप एक राजनेता हैं, तो आपको मोटी चमड़ी रखनी चाहिए।'
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याचिका में क्या आरोप?
भाजपा की तेलंगाना इकाई (जिसका प्रतिनिधित्व उसके महासचिव कर रहे थे) ने मई 2024 में रेड्डी के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने पार्टी के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ भाषण दिया था। दावा किया गया कि CM रेड्डी ने तेलंगाना कांग्रेस के साथ मिलकर एक फर्जी और संदिग्ध राजनीतिक कहानी गढ़ी कि अगर भाजपा सत्ता में आई तो वह आरक्षण खत्म कर देगी। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि कथित मानहानिकारक भाषण ने एक राजनीतिक दल के रूप में भाजपा की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है।

निचली अदालत में क्या हुआ था?
एक निचली अदालत ने पिछले साल अगस्त में कहा था कि रेड्डी के खिलाफ तत्कालीन भारतीय दंड संहिता और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125 के तहत मानहानि के कथित अपराधों के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनता है। अधिनियम की धारा 125 चुनाव के संबंध में विभिन्न वर्गों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने से संबंधित है। रेड्डी ने निचली अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी और तर्क दिया कि शिकायत में लगाए गए आरोप उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनाते। उन्होंने तर्क दिया कि राजनीतिक भाषणों को मानहानि का विषय नहीं बनाया जा सकता।


हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

  • उच्च न्यायालय ने बाद में टिप्पणी की, 'भले ही यह न्यायालय यह स्वीकार कर ले कि शिकायतकर्ता भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय इकाई का सदस्य है और उसे भारतीय जनता पार्टी का सदस्य माना जा सकता है, फिर भी प्राधिकरण के अभाव में शिकायत विचारणीय नहीं है।' 
  • कोर्ट ने कहा था कि न तो शिकायतकर्ता और न ही उसके प्रतिनिधि को भाजपा की राष्ट्रीय इकाई की ओर से शिकायत दर्ज करने के लिए अधिकृत किया गया था।
  • हाईकोर्ट ने कहा, 'राजनीतिक भाषणों को अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। यह आरोप लगाना कि ऐसे भाषण मानहानिकारक हैं, एक और अतिशयोक्ति है।' 
  • रेड्डी की याचिका स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश और मामले से संबंधित कार्यवाही को रद्द कर दिया।
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