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SC: झारखंड के चीफ जस्टिस की अपील कॉलेजियम ने सुनी, केंद्र से की राजस्थान हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की सिफारिश

Sun, 31 Dec 2023 08:48 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आदर्श शर्मा Updated Sun, 31 Dec 2023 08:48 PM IST
सार

झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने अपने स्थानांतरण के लिए अनुरोध किया था, जिस पर कॉलेजियम ने फैसला लेते हुए केंद्र से उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की सिफारिश की हैं। 

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SC collegium recommends transfer of Justice Shree Chandrashekhar to Rajasthan high court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने केंद्र से न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर को झारखण्ड उच्च न्यायालय से राजस्थान उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने की सिफारिश की है। कॉलेजियम में जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस  सूर्यकांत और जस्टिस अनिरूद्ध बोस भी शामिल थे, जिन्होंने 29 दिसंबर को हुई बैठक में यह फैसला लिया था। 
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अनुरोध पर कॉलेजियम ने लिया निर्णय
कॉलेजियम ने मुताबिक, 29 दिसंबर, 2023 को एक संचार द्वारा झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने झारखंड उच्च न्यायालय से अपने स्थानांतरण के लिए अनुरोध किया था। कॉलेजियम ने कहा कि उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए कॉलेजियम यह सिफारिश करने का निर्णय लेता है कि श्री न्यायमूर्ति श्री चन्द्रशेखर को राजस्थान उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जाए।
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जानिए क्या होता है कॉलेजियम
दरअसल, कॉलेजियम हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति की एक व्यवस्था है। ये व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट ने खुद तय की है। इसके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और जजों के ट्रांसफर पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और चार अन्य सबसे सीनियर जजों का समूह फैसला लेता है।  इसी तरह हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की सिफारिश उस हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और दो सबसे सीनियर जजों का समूह करता है। इन सिफारिशों की समीक्षा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और दो सबसे सीनियर जज करते हैं। इसके बाद ये नाम राष्ट्रपति के पास जाता है। जजों के समूह यानी कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिशों को सरकार राष्ट्रपति के पास भेजती है। इन सिफारिशों को मानना राष्ट्रपति और सरकार के लिए अनिवार्य होता है। सरकार चाहे तो कॉलेजियम से एक बार ये अनुरोध कर सकती है कि वह अपनी सिफारिश पर पुनर्विचार करे, लेकिन कॉलेजियम ने वही सिफारिश फिर से भेज दी, तो सरकार के लिए उसे मंजूर करना जरूरी होता है। यानी कॉलेजियम सिस्टम में सरकार की भूमिका सलाह देने या अपनी असहमति जताने तक सीमित है। इसे मानना या न मानना जजों के समूह के हाथ में है। 
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